
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जहांगीराबाद स्थित बूचड़खाने में सामने आए बहुचर्चित गौकशी मामले की जांच अब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआइटी) को सौंप दी गई है। करीब एक महीने तक चली जहांगीराबाद थाना पुलिस की जांच में गौकशी से जुड़े कोई ठोस और निर्णायक सबूत सामने नहीं आने के बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि एसआइटी के गठन की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन अब तक उसमें शामिल अधिकारियों की आधिकारिक नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिससे जांच की गति और मंशा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जहांगीराबाद पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच में बूचड़खाने परिसर में लगे कुल 32 सीसीटीवी कैमरों की करीब 35 दिन की रिकार्डिंग खंगालने का दावा किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फुटेज की गहन पड़ताल में कहीं भी गौवंश दिखाई नहीं दिया। कैमरों में केवल भैंसों को लाया और काटा जाना रिकार्ड हुआ है। इसी आधार पर पुलिस का कहना है कि प्रत्यक्ष रूप से बूचड़खाने के अंदर गौकशी के सबूत नहीं मिले हैं।
हालांकि, पुलिस के इस दावे से हिंदू संगठनों की शंकाएं कम नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि यदि गौवंश कैमरों में नजर नहीं आया, तो यह भी संभव है कि गौमांस बाहर से लाकर परिसर में रखा या पैक किया गया हो। इसी आशंका के चलते मामला और भी गंभीर होता जा रहा है और जांच को उच्च स्तर पर ले जाने की मांग लगातार उठ रही थी। सूत्रों के अनुसार, जहांगीराबाद पुलिस की जांच में कई तकनीकी और प्रक्रियागत सीमाएं सामने आईं। मांस की पहचान, सैंपल की लैब जांच और अंतरराज्यीय परिवहन के लिंक को मजबूती से जोड़ने में पुलिस नाकाम रही।
इसी वजह से वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को एसआइटी को सौंपने का निर्णय लिया, ताकि निष्पक्ष और गहन जांच हो सके। एसआइटी को जांच सौंपने के बाद अब बूचड़खाने के संचालन, मांस की सप्लाई चेन, परिवहन दस्तावेज, ठेकेदारों और कंपनी के साझेदारों की भूमिका की भी विस्तार से जांच होगी।
बूचड़खाने का ठेका लेने वाली लाइवस्टाक कंपनी के मुख्य संचालक असमल चमड़ा उर्फ असलम कुरैशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि कंपनी के दो अन्य साझेदार, जो दूसरे राज्यों के निवासी बताए जा रहे हैं, अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस के अनुसार दोनों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है और उनकी तलाश जारी है। संभावित ठिकानों पर दबिश की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा पुलिस परिवहन से जुड़े लोगों की जांच भी कर रही है।