
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। उच्च शिक्षा इन दिनों प्रयोगों का रंगमंच बनी हुई है। यह सारा बदलाव नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नाम पर हो रहा है। अब कहा जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के कॉलेजों में दो बार प्रवेश का अवसर मिलेगा। नई व्यवस्था में मई से जुलाई और नवंबर से जनवरी तक दो बार नामांकन प्रक्रिया संचालित की जाएगी। पहले प्रवेश को जुलाई सत्र कहा जाएगा और दूसरे को जनवरी सत्र। यह व्यवस्था नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू हो जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग दो बार प्रवेश प्रक्रिया को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। नई व्यवस्था को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक बुलाई। बैठक में प्रवेश प्रक्रिया, शैक्षणिक सत्र के संचालन और अकादमिक कैलेंडर को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय विद्यार्थियों के हित में लिया गया है, ताकि किसी कारणवश प्रवेश से वंचित रहने पर उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष खराब न हो।
इससे हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलने की संभावना है। साथ ही खाली सीटों को भरने के लिए भी एक अवसर रहेगा। विभाग से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। शासन से अनुमति मिलने के बाद लागू कर दिया जाएगा। अभी तक केवल भोज मु्क्त विवि में दो बार प्रवेश प्रक्रिया का नियम है।
अधिकारियों का मानना है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित कर रहा है। दूसरी परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दूसरी नामांकन प्रक्रिया में प्रवेश का मौका मिल जाएगा। यह उन विद्यार्थियों का साल खराब होने से बचा सकता है जिन्होंने इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की उम्मीद में किसी महाविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन नहीं किया। मेडिकल-इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं में असफल होने पर उनका साल खराब होने का खतरा होता है।
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अधिकारियों ने बताया कि अब प्रवेश प्रक्रिया दो बार होगी तो परीक्षा भी दो बार होगी। जुलाई में प्रवेशित विद्यार्थियों की परीक्षा अलग तिथियों पर होगी और जनवरी में प्रवेशित विद्यार्थियों की परीक्षा अलग तिथि पर होगी। अब सेमेस्टर परीक्षाएं ली जाएंगी।
आगामी सत्र में कालेजों में दो बार प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। - प्रबल सिपाहा, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग