
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। महिलाओं के प्रति असभ्य टिप्पणी करने वाले दतिया जिले के भांडेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक फूल सिंह बरैया (Phool Singh Baraiya Controversy) का बचाव पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने किया है। उन्होंने कहा कि वह बरैया का नहीं है। उन्होंने बिहार के एक विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे हरि मोहन झा की पुस्तक का उल्लेख किया था। कार्रवाई पुस्तक लिखने वाले पर होनी चाहिए। दरअसल, बरैया का बयान सामने आने के बाद वे पार्टी नेता राहुल गांधी के साथ इंदौर में उपस्थित थे, जिस पर भाजपा ने आपत्ति उठाते हुए कार्रवाई करने की मांग की थी।
बरैया ने एक मीडिया साक्षात्कार में एससी, एसटी और ओबीसी महिला के साथ दुष्कर्म की अधिक घटनाओं को लेकर कहा था कि उनके (नाम नहीं लिया) धर्म ग्रंथ में लिखा है कि इनसे दुष्कर्म से तीर्थ का फल प्राप्त होगा। उन्होंने इसका संदर्भ रुद्रयामल तंत्र नामक पुस्तक में होने का तर्क दिया था। इसे लेकर भाजपा ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज में जहर घोलने वाले बरैया के बयान पर राहुल गांधी से उन्हें पार्टी से बाहर करने की मांग की।
उधर, माहौल गरमाता देख कांग्रेस ने बरैया से पल्ला झाड़ा और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्टीकरण मांगा। बरैया ने सफाई दी कि जिस बयान को लेकर मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं वह मेरा नहीं बिहार के विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे हरिमोहन झा का है, मैंने किसी संदर्भ में उसे दोहराया है। बरैया को चौतरफा घिरता देख पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बचाव में आए और पुस्तक लिखने वाले पर कार्रवाई की मांग उठाई।
इस पर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने एक्स पर पोस्ट किया कि दिग्विजय सिंह द्वारा फूल सिंह बरैया का बचाव करना कांग्रेस के नैतिक दिवालियापन की खुली स्वीकारोक्ति है। यदि बरैया के शब्द उनके निजी विचार नहीं थे, तो ऐसी घृणित और महिला-विरोधी बयान देने की आवश्यकता ही क्या थी? क्या किसी पुस्तक का हवाला देकर महिलाओं की गरिमा पर प्रहार उचित हो जाता है? क्या सार्वजनिक रूप से दिए गए बयान की जिम्मेदारी वक्ता की नहीं होती?
और यदि वे शब्द गलत थे, तो कांग्रेस ने उसी समय सार्वजनिक खंडन क्यों नहीं किया? यह कोई 'संदर्भ' नहीं, बल्कि कांग्रेस की महिला-विरोधी और दलित-विरोधी मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है। कांग्रेस या तो ऐसे बयानों की जिम्मेदारी ले या देश की मातृशक्ति और अनुसूचित जाति-जनजाति समाज से बिना शर्त माफी मांगकर अपने दूषित विधायक को निष्कासित करे।
यह भी पढ़ें- MP Road Accident: खरगोन में भीषण हादसा... कार ने चार लोगों को रौंदा, एक की दर्दनाक मौत; तीन घायल