
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसमें फोकस किसानों की आमदनी बढ़ाने पर रहेगा। इसके लिए सिंचाई क्षमता का विस्तार किया जाएगा तो उद्यानिकी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रत्येक जिले में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट स्थापित की जाएंगी। पशुपालन करने पर प्रोत्साहन राशि मिलेगी। ऊर्जा, जल संसाधन, पशुपालन एवं डेयरी के साथ कृषि बजट में वृद्धि की जा सकती है।
उधर, पूंजीगत व्यय 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक रखे जा सकते हैं ताकि अधोसंरचना विकास को गति दी जा सके। औद्योगिक केंद्रों का विकास, 450 नए सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण के साथ स्कूल-कालेजों में सुविधा के विकास के लिए स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग को अधिक राशि दी जा सकती है। स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग सभी जिलों में संभावनाएं तलाश करेगा और क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान मिलेगा। वहीं, सोयाबीन के बाद सरसों को भी भावांतर योजना के दायरे में लाने की घोषणा बजट में हो सकती है। कृषि सहित संबद्ध क्षेत्रों का बजट 70 हजार करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में इसे 13,409 करोड़ रुपये बढ़ाकर कर 58,257 करोड़ रुपये किया गया था।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिंचाई क्षमता साढ़े सात लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी पूर्ति के लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास की विभिन्न योजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं। बजट 17, 214 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 19-20 हजार करोड़ रुपये किया जा सकता है
सरकार का लक्ष्य 2030 तक राज्य की कुल बिजली खपत का 50 प्रतिशत हिस्सा सौर, पवन, जल ऊर्जा से पूरा करना है। इसके लिए संयंत्र लगाने वालों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उपभोक्ताओं को बिजली बिल से राहत देने के लिए अनुदान की योजना जारी रखी जाएंगी। इसके लिए 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रविधान रखा जा सकता है।
सरकार रासायनिक खादों के बेजा उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति को होने वाले नुकसान को देखते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगी। इसे अपनाने वालों को प्रोत्साहन राशि मिलेगी। गोपालन के लिए भी किसानों को प्रेरित किया जाएगा। दूध और उससे बने उत्पादों के लिए बाजार की व्यवस्था भी होगी। सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों का विस्तार किया जाएगा। जैविक खाद बनाने की यूनिट बनाने में उद्योग विभाग से सहायता दिलाई जाएगी।
उद्यानिकी से जुड़ी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए कृषि निधि से व्यवस्था कराई जाएगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए ढाई हजार करोड़ रुपये, शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध कराने के लिए 750 करोड़, भावांतर भुगतान योजना के लिए एक हजार करोड़, किसान कल्याण योजना में छह हजार करोड़ रुपये का प्रविधान रखा जा सकता है।
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मध्य प्रदेश में अधोसंरचना विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है। दरअसल, प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा रहे हैं, सांदीपनि विद्यालयों, कालेज और अस्पताल भवन बनाए जा रहे हैं। इन सभी के लिए बजट में विभागवार प्रावधान भी रखे जाएंगे।
बजट में सरकार सीएम केयर योजना की घोषणा कर सकती है। इसमें सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार किया जाएगा। कर्मचारियों को आयुष्मान की तरह स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने और नए मेडिकल कालेजों के लिए भी प्रविधान किया जाएगा।