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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। कहते हैं कि सब्र का फल मीठा होता है, लेकिन मध्य प्रदेश के शिक्षकों के लिए यह फल न केवल मीठा है, बल्कि आर्थिक समृद्धि की चाशनी में डूबा हुआ भी है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने मंगलवार को एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने प्रदेश के सवा लाख शिक्षकों के चेहरों पर बरसों पुरानी मुस्कान वापस लौटा दी है।
35 साल की लंबी और निष्ठावान सेवा पूरी करने वाले गुरुजनों को अब 'चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान' की सौगात मिलेगी। लेकिन आसान भाषा में समझने की जरूरत है कि आखिर ये फायदे किन्हें मिलेंगे और वेतन पर इसका कितना असर दिखेगा।
अक्सर सरकारी शब्दावली आम आदमी को उलझा देती है, लेकिन इसे समझना बेहद आसान है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि जिन दो कैटेगरी के लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है वह कौन है... इस योजना का मुख्य लाभ LDT और UDT संवर्ग को मिलने वाला है।
LDT (Lower Division Teacher): इन्हें हम 'सहायक शिक्षक' के रूप में जानते हैं। पाज्य में इनकी संख्या लगभग 70 हजार है।
UDT (Upper Division Teacher): इन्हें 'उच्च श्रेणी शिक्षक' या माध्यमिक शिक्षक कहा जाता है। इनकी संख्या प्रदेश में करीब 52 हजार है।
इन दोनों ही वर्गों के लिए अब वेतन का नया नियम लागू होने वाला है।
एमपी कैबिनेट के इस फैसले से शिक्षकों की आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल आएगा। अब 'ग्रेड पे' बदलते ही हाथ में आने वाली रकम बदल जाएगी। आइए देखते हैं कि आपकी नई सैलरी कितनी होने वाली है...
इस बदलाव का मतलब यह है कि एक UDT शिक्षक का औसत वेतन अब 1.25 लाख रुपये से भी ऊपर निकल जाएगा, जबकि LDT शिक्षक भी 1.15 लाख रुपये के आंकड़े को छू लेंगे।
यह लाभ केवल भविष्य के लिए नहीं है, बल्कि सरकार ने पीछे मुड़कर भी देखा है। इस वेतनमान की पात्रता 1 जुलाई 2023 से तय की गई है।
एरियर का लाभ: जिन शिक्षकों ने जुलाई 2023 से पहले अपनी 35 साल की सेवा कर ली है, उन्हें पिछले ढाई साल का बकाया (एरियर) एक साथ मिलेगा। यह राशि 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक हो सकती है।
विभाग अब हर शिक्षक की सेवा अवधि का सूक्ष्म परीक्षण करेगा। इस प्रक्रिया में करीब दो महीने लगेंगे। माना जा रहा है कि अप्रैल 2026 में शिक्षकों के बैंक खातों में बढ़ी हुई सैलरी आ सकती है।
जो शिक्षक अपनी सेवा पूरी कर रिटायर हो चुके हैं, उनके मन में एक सवाल जरूर है - 'क्या हमें भी कुछ मिलेगा?' हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन सुगबुगाहट है कि उन्हें पेंशन में इस वृद्धि का आनुपातिक लाभ मिल सकता है, जिससे उनकी ढलती उम्र की शाम और अधिक सुरक्षित हो जाएगी।
कुल मिलाकर, 322 करोड़ 34 लाख रुपये की यह भारी-भरकम स्वीकृति केवल एक बजट राशि नहीं, बल्कि उन हाथों का आभार है जिन्होंने प्रदेश की पीढ़ी को गढ़ा है।
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