MP जेल कर्मचारियों को 19 साल बाद मिला सरकारी क्वार्टर का तोहफा, 38 जेलों में बनेंगे 244 नए 2BHK फ्लैट
मध्य प्रदेश जेल विभाग के कर्मचारियों के लिए 52.15 करोड़ रुपये से 38 जेलों में 244 नए क्वार्टर बनेंगे। करीब 19 साल बाद मंजूर परियोजना से आवास संकट कुछ ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 01:32:01 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 01:32:01 PM (IST)
MP जेल कर्मचारियों को 19 साल बाद मिला सरकारी क्वार्टर का तोहफा। (फाइल फोटो)HighLights
- 38 जेलों में 244 नए एच-टाइप क्वार्टर बनाए जाएंगे।
- परियोजना के लिए 52.15 करोड़ रुपये की प्रशासकीय मंजूरी मिली। लो
- क निर्माण विभाग को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई।
डिजिटल डेस्क। मध्य प्रदेश के जेल विभाग में तैनात प्रहरियों और मैदानी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। करीब 19 साल के लंबे इंतजार के बाद राज्य शासन ने जेल कर्मचारियों के लिए नए सरकारी क्वार्टर बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
सुरक्षा व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने के मकसद से सरकार ने 52 करोड़ 15 लाख रुपये से ज्यादा के बजट वाले इस हाउसिंग प्रोजेक्ट को प्रशासकीय मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेश की 38 जेलों में 244 नए फ्लैट्स का निर्माण किया जाएगा।
38 जेलों के कर्मचारियों को मिलेगा लाभ, PWD करेगा निर्माण
- इस योजना के अंतर्गत 'एच-टाइप' यानी 2BHK फ्लैट्स बनाए जाने हैं। मंजूर किए गए प्रोजेक्ट में 5 जिला जेल और 33 सब-जेल शामिल हैं। इन सभी आवासों को बनाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंपी गई है। चूंकि यह योजना सब-जेलों और जिला जेलों के लिए ही है, इसलिए भोपाल सेंट्रल जेल इसमें शामिल नहीं है।
- हालांकि, भोपाल संभाग के चार पड़ोसी जिलों को इसका फायदा मिलेगा, जहां कुल 52 घर बनेंगे। इनमें रायसेन में 28, सीहोर में 12 और विदिशा व राजगढ़ में 8-8 आवास शामिल हैं।
भविष्य की जरूरतों को देखकर तैयार किया गया डिजाइन
- इन घरों का डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि जरूरत पड़ने पर भविष्य में इनके ऊपर एक या दो मंजिलें और बढ़ाई जा सकें। जगह की उपलब्धता के हिसाब से 4, 8, 12 और 16 आवास वाले अलग-अलग ब्लॉक बनाए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर सिवनी जिला जेल में 16 घरों का सबसे बड़ा ब्लॉक बनेगा।
वहीं सीहोर, देवास और गैरतगंज में 12-12 आवासों के ब्लॉक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा सीधी, श्योपुर, महिदपुर आदि जगहों पर 8 घरों वाले, जबकि गंजबासौदा, नरसिंहगढ़ जैसे स्थानों पर 4 घरों वाले ब्लॉक बनेंगे। अब भी बनी रहेगी कमी: 4450 आवासों की है जरूरत
- भले ही 19 साल बाद नए घर बन रहे हों, लेकिन विभाग में आवासों का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं होगा। आखिरी बार 2004 से 2007 के बीच करीब 1200 क्वार्टर बने थे, उसके बाद से कोई निर्माण नहीं हुआ। वर्तमान में विभाग में लगभग 8000 कर्मचारी पदस्थ हैं और 4450 घरों की जरूरत है।
- पुराने 1200 और अब बनने वाले 244 घरों को मिला लिया जाए, तो भी कुल आवासों की संख्या 1444 तक ही पहुंचेगी। ऐसे में 3000 से अधिक कर्मचारियों को अब भी किराए के मकानों में ही गुजर-बसर करना पड़ेगा।
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बेहतरीन परफॉर्मेंस के चलते मिली योजना को जल्द मंजूरी
- जेल डीजी करुण कपूर जब विभिन्न जिलों के दौरे पर गए थे, तब कर्मचारियों ने उनके सामने यह बड़ी समस्या रखी थी कि सुरक्षा कारणों से उन्हें जेल कैंपस के पास ही रहना पड़ता है, लेकिन सरकारी घर न होने से काफी परेशानी होती है। इसके बाद विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके लिए घोषणा की थी।
- खास बात यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में जेल विभाग ने नव-निर्माण के लिए मिले 231 करोड़ रुपये के बजट का 92% हिस्सा खर्च कर बेहतरीन काम किया था। उनका परफॉर्मेंस इंडेक्स सुधरकर 1.54 हो गया था। इसी अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए सरकार ने पहले ही चरण में इस हाउसिंग प्रोजेक्ट को अपनी मंजूरी दे दी है।
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