MP पर्यटन विभाग की घोर लापरवाही, विश्व प्रसिद्ध चंदेरी साड़ी को यूनेस्को का स्थायी टैग दिलाने में दिखा रहा उदासीनता
आरटीआई से खुलासा हुआ है कि 10 साल से यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल चंदेरी साड़ी का मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के पास कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।
Publish Date: Tue, 27 Oct 2026 03:56:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2026 03:56:01 PM (IST)
MP पर्यटन विभाग की घोर लापरवाही। (फाइल फोटो)HighLights
- 10 साल से यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में है चंदेरी।
- एमपी पर्यटन बोर्ड के पास इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं।
- आरटीआई के जवाब में पर्यटन विभाग ने खड़े किए हाथ।
डिजिटल डेस्क। विश्व प्रसिद्ध चंदेरी साड़ी और यहां की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत हुए खुलासे से पता चला है कि पिछले एक दशक से यूनेस्को की अस्थायी (टेंटेटिव) सूची में शामिल होने के बावजूद पर्यटन विभाग के पास चंदेरी साड़ी से जुड़ा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।
आरटीआई के जवाब में विभाग ने खड़े किए हाथ
- मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड, भोपाल ने आरटीआई के तहत दिए गए अपने लिखित जवाब में यह चौंकाने वाली बात स्वीकार की है। बोर्ड का कहना है कि 'आइकोनिक साड़ी वीविंग क्लस्टर ऑफ इंडिया' के नॉमिनेशन के तहत चंदेरी साड़ी को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने को लेकर उनके प्लानिंग विभाग ने कोई सीधी कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण उनके पास कोई भी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि 15 अप्रैल 2014 से ही चंदेरी साड़ी यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में दर्ज है, जिसकी पुष्टि आज भी यूनेस्को की आधिकारिक वेबसाइट पर की जा सकती है। यह भी पढ़ें- रायपुर में अनाथ नाबालिग से दुष्कर्म, भतीजी को डराकर गर्भवती करने वाले बड़े पिता और जीजा को 20 साल की जेल
स्थायी टैग की योग्यता
- चंदेरी का समृद्ध इतिहास, शानदार स्थापत्य कला और विश्वविख्यात हैंडलूम इसे यूनेस्को की स्थायी (वर्ल्ड हेरिटेज) सूची में जगह दिलाने के लिए पर्याप्त योग्यता रखते हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रशासन गंभीरता दिखाए और चंदेरी को स्थायी सूची का दर्जा मिल जाए, तो इससे क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही तेजी से बढ़ेगी। इससे न सिर्फ स्थानीय साड़ी व्यापार को वैश्विक स्तर पर बूम मिलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा मिलेगी।
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क्रिएटिव सिटी नेटवर्क की स्टडी भी ठंडे बस्ते में
पर्यटन विभाग की लापरवाही का मामला केवल यूनेस्को के टेंटेटिव रिकॉर्ड गायब होने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में चंदेरी को यूनेस्को के 'क्रिएटिव सिटी नेटवर्क' वर्ग में शामिल कराने के उद्देश्य से एक फीजिबिलिटी स्टडी भी कराई गई थी। लेकिन उस दिशा में आगे क्या कदम उठाए गए, इसको लेकर भी विभाग का रवैया उदासीन ही नजर आ रहा है।