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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: प्रदेश के वातावरण में नमी की मात्रा कम होने से घने कोहरे से फिलहाल राहत मिल गई है। धूप खिलने से दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी होने लगी है। हालांकि रात के समय अधिकतर शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम है। इस वजह से सुबह-शाम सिहरन महसूस हो रही है, लेकिन दिन में धूप गुनगुनी राहत दे रही है।
उधर, शनिवार को प्रदेश में सबसे कम 3.6 डिग्री सेल्सियस तापमान खजुराहो में दर्ज किया गया। खजुराहो एवं शिवपुरी में शीतलहर का प्रभाव रहा। ग्वालियर में मध्यम स्तर का कोहरा रहा। अधिकतर शहरों में सुबह से ही धूप निकली। दिन का सबसे अधिक 30.5 डिग्री सेल्सियस तापमान खंडवा में दर्ज किया गया।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अभी दो दिनों तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। यानी कोहरे से राहत मिलेगी। धूप खिली रहेगी।
मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और उससे लगे पंजाब पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में बना हुआ है। इसके साथ एक द्रोणिका भी संबद्ध है। हरियाणा पर भी हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम भारत पर 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 252 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं चल रही हैं।
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मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि वातावरण से नमी कम होने के कारण कोहरे का असर कम हुआ है। इस वजह से दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने पर दो दिन बाद रात के तापमान में एक बार फिर गिरावट होने की संभावना है।
उत्तर भारत में पड़ रहे घने कोहरे के कारण पिछले एक सप्ताह से भोपाल एक्सप्रेस, तुलसी एक्सप्रेस, कर्नाटका एक्सप्रेस, अमृतसर दादर एक्सप्रेस और जाट हमसफर समेत विभिन्न ट्रेनों घंटों लेट हो रही हैं। जिस कारण भोपाल समेत अन्य शहरों के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पर रहा है।
कभी कोहरा के वजह से कम विजिबिलिटी (दृश्यता), कभी तकनीकी खराबी, तो कई बार सिग्नल फेल्योर या रूट पर बढ़ते दबाव के कारण ट्रेनें आठ से दस घंटे तक लेट हो रही हैं। जिससे कोई नौकरी के इंटरव्यू से चूक गया, तो कोई शादी, परीक्षा या इलाज के लिए समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
यात्रियों का कहना है कि जब वो सफर पर निकलते हैं तो उनका एक प्लान होता है, जो ट्रेन के समय पर नहीं पहुंचने के कारण खराब हो जाता है। कई यात्रियों का यह भी कहना है कि समय पर ट्रेन नहीं होने के कारण उनके बहुत जरूरी काम नहीं हो पाते हैं। ऐसे में क्या रेलवे के पास इन समस्याओं से निपटने के लिए कोई स्थायी और प्रभावी समाधान नहीं है।