
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: राजधानी में सामने आया गौकशी और गोमांस का मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की गंभीर विफलता बन चुका है। शहर के आधुनिक बूचड़खाने में धड़ल्ले से गौवंश का वध किया जा रहा था और हैरानी की बात यह है कि निगम से जुड़ा डॉक्टर गौर नियमित रूप से इसे क्लीनचिट देता रहा। यह खुलासा होते ही प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गौकशी के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को न सिर्फ बूचड़खाने का टेंडर दिया गया, बल्कि मृत गौवंश के नष्टीकरण का ठेका भी उसी के पास था। ऐसे में गौमांस तस्करी की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। यानी जो व्यक्ति अवैध रूप से गौवंश काट रहा था, वही उनके नष्टीकरण का जिम्मेदार भी था। यह व्यवस्था नहीं, बल्कि खुलेआम अपराध को संरक्षण देने जैसा है।
उधर 17 दिसंबर को हिंदू संगठनों की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 26 टन गोमांस जब्त किया था। इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया गया, लेकिन असल सवाल यह है कि जब इतना बड़ा खेप पकड़ा गया, तो फिर गोमांस नगर निगम ने गोमांस का सिर्फ सैंपल लेकर खानापूर्ति की और फिर गौमांस से भरे कंटेनर को आरोपितों को वापस सौंप दिया, जिसके बाद मुंबई के रास्ते गौमांस विदेश चला गया।
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सूत्रों के अनुसार, बूचड़खाने में रोजाना सैकड़ों जानवर काटे जा रहे थे। कागजों में उन्हें भैंस या अन्य पशु बताया जाता था, जबकि हकीकत में गौवंश का वध हो रहा था। मामला उजागर होने के बाद नगर निगम ने बूचड़खाने को सील तो कर दिया है, लेकिन इस गंभीर अपराध के लिए अब तक किसी भी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं की गई है।न ही यह स्पष्ट किया गया है कि विदेश भेजे गए गोमांस की अनुमति किसने दी।
निगम ने कार्रवाई करते हुए बूचड़खाना सील कर दिया है। अब केस दर्ज करने के बाद पुलिस के पास जांच है। उनकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी, अभी तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है।
-संस्कृति जैन, नगरनगिम आयुक्त