
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया भोपाल : मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने इंदौर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम को ‘झूठ की गूंज’ का कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि हमेशा की तरह राहुल गांधी अपने विषय के प्रति लापरवाह नजर आए और आज भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। बिना तैयारी के उन्होंने कुछ बच्चों और युवा मित्रों से संवाद किया। ऐसा लगा कि कांग्रेस के लोगों ने अपने एजेंडे के आधार पर जनता के बीच भ्रम फैलाने की दृष्टि से यह कार्यक्रम आयोजित किया।
दुख इस बात का है कि जब बात बच्चों और स्कूल शिक्षा की आती है, तो तथ्यों को भी सामने रखना चाहिए। मध्य प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों सहित सरकार की विभिन्न पहलों के परिणामस्वरूप ड्रापआउट दर को शून्य तक लाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम हुआ है। यह तथ्यात्मक आंकड़ा है, जिसे कांग्रेस और उनके साथियों को देखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में ड्रापआउट दर लगभग 16 प्रतिशत थी। वर्ष 1956 से 2002-03 तक अधिकांश समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही। उस समय स्कूल शिक्षा का बजट लगभग 2,000 करोड़ के आसपास था, जबकि आज मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा बजट 38,658 करोड़ रुपये है।
डा. यादव ने कहा कि मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं, उनके शासनकाल में क्या बच्चों को गणवेश दिए जाते थे? क्या आने-जाने के लिए साइकिल दी जाती थी? क्या मेधावी बच्चों को लैपटाप और स्कूटी जैसी सुविधाएं दी जाती थीं? आज हमारी सरकार बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
अगर स्वास्थ्य शिक्षा की बात करें, तो वर्ष 1956 से 2002-03 तक प्रदेश में केवल पांच मेडिकल कालेज थे। अटल सरकार के समय प्रदेश को एक और मेडिकल कालेज मिला। आज मप्र में 33 मेडिकल कालेज संचालित हो रहे हैं। कांग्रेस के शासनकाल में मेडिकल कालेजों में लगभग 680 सीटें थीं, जो आज बढ़कर 7,000 से अधिक हो गई हैं।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि इंदौर में राहुल गांधी के तथाकथित “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम की सच्चाई पूरे प्रदेश के सामने आ गई है। यह छात्रों की वास्तविक आवाज नहीं, बल्कि कांग्रेस द्वारा तैयार किया गया स्क्रिप्टेड राजनीतिक फर्जीवाड़ा था। जिन लोगों को आम छात्र बताकर मंच पर प्रस्तुत किया गया, वे कांग्रेस और एनएसयूआइ से जुड़े पदाधिकारी निकले।
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यह मप्र के छात्रों और युवाओं के साथ सीधा धोखा है। कांग्रेस के पास अब युवाओं का समर्थन नहीं बचा है, इसलिए वह अपने ही पदाधिकारियों को छात्र बनाकर राहुल गांधी के सामने खड़ा कर रही है। इस झूठ को परोसने के लिए जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को तत्काल माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व को ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल पदाधिकारियों के साथ-साथ राहुल गांधी पर भी तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
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