
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में मंदिरों से जुड़ी जमीनों का उपयोग अब उनकी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इन जमीनों पर कृषि के साथ व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की कार्ययोजना तैयार होगी। बड़े मंदिरों की आय का कुछ हिस्सा आसपास की गोशालाओं और वृंदावन गांवों की व्यवस्था सुधारने पर भी खर्च किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्यसमिति की बैठक में यह निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों से जुड़ी भूमि का उपयोग उनकी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाए। इसके लिए कृषि और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की योजना बनाई जाए। मंदिरों में मौजूद जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार और प्रबंधन का काम जल गंगा अभियान के तहत किया जाएगा। उन्होंने श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित करने और इनके विकास में कृष्ण भक्ति से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि उज्जैन के सांदीपनि आश्रम के विकास और जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन हो चुका है। प्रदेश में 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और श्रीकृष्ण पाथेय की जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। बैठक में नारायण धाम महिदपुर, श्रीकृष्ण धाम छतरपुर, जानापाव महू, अमझेरा धार, मां जागेश्वरी लोक चंदेरी, श्रीकृष्ण राधा लोक पन्ना और रायसेन जिले की जमगढ़ पहाड़ियों में चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
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बैठक में भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित शोध, वृत्तचित्र, नाट्य और संगीत श्रृंखलाओं के लिए समर्पित यूट्यूब डिजिटल प्लेटफार्म शुरू करने की योजना पर भी चर्चा हुई। उज्जैन में दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों के लिए अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विचार आज भी जीवन प्रबंधन, अर्थव्यवस्था, कृषि और गौ-संवर्धन जैसे क्षेत्रों में प्रासंगिक हैं। इन विषयों पर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विचार सत्र और संगोष्ठियां आयोजित की जाएं।