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राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। शहरी क्षेत्रों में आम लोगों को सस्ती परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता के मॉडल पर सरकार जल्द ही 'सहकार टैक्सी सेवा' प्रारंभ करेगी। इसका संपूर्ण संचालन सहकारी समितियों के हाथ में रहेगा। इससे समितियों की आय बढ़ेगी। जो ड्राइवर इस सेवा से जुड़ेंगे, उनकी आमदनी बढ़ेगी क्योंकि सहकारी समितियां निजी एग्रीगेटर जैसा कमीशन नहीं लेंगी। अभी निजी एग्रीगेटर जैसे ओला, उबर कंपनियां कमीशन लेती हैं।
टैक्सी एग्रीगेटर एक प्लेटफार्म सामान्यतः एप होता है जो यात्रियों को विभिन्न टैक्सी संचालकों की उपलब्धता की जानकारी संभावित किराये के साथ देता है। बुकिंग सुविधा भी उपलब्ध कराता है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की घोषणा के बाद दिल्ली और गुजरात में इसे लेकर पायलट प्रोजेक्ट संचालित किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग भी इसकी तैयारी कर रहा है। बजट में इस योजना की घोषणा भी हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से रोजगार के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। नागरिकों को सस्ती और अच्छी सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा से पर्यटन, परिवहन सेवा के बाद अब टैक्सी सेवा के क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया गया है। सहकार टैक्सी सेवा के संचालन का जिम्मा प्राथमिक सहकारी समितियों को दिया जाएगा। राज्य स्तर पर एक महासंघ बनेगा। ड्राइवर इसमें पंजीयन कराएंगे। बुकिंग का मॉडल प्रचलित एग्रीगेटर की तरह रहेगा।
जैसे ही बुकिंग आएगी, पंजीकृत ड्राइवर के पास संदेश पहुंच जाएगा। चूंकि, इस सेवा के लिए ड्राइवरों को कोई कमीशन नहीं देना है इसलिए उन्हें अधिक लाभ होगा। यह सेवा यात्रियों के लिए भी तुलनात्मक रूप से सस्ती होगी क्योंकि कमीशन का कोई प्रावधान नहीं रखा जाएगा। निजी एग्रीगेटर द्वारा 20 से 25 प्रतिशत प्रति राइड कमीशन लिया जाता है। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि सहकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। समितियों को उद्योगों के साथ जोड़ने के अलावा नए-नए क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। सहकार टैक्सी सेवा भी इसमें से एक है। एप बनवाने, संचालन आदि का खर्च सरकार वहन करेगी।
सूत्रों का कहना है कि योजना की शुरुआत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित बड़े शहरों से होगी। इसके बाद इसका विस्तार किया जाएगा। यदि कोई समिति वाहन खरीदकर स्वयं संचालन करना चाहेगी तो उसके लिए उसे बैंक से ऋण भी दिलाया जाएगा। यह ठीक वैसा ही होगा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में उचित मूल्य की दुकान से राशन पहुंचाने के लिए सरकार ने अपनी गारंटी पर ऋण दिलाकर वाहन खरीदवाए हैं।
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