
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के 68 पीएमश्री और स्वशासी महाविद्यालयों में नए सत्र से भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषा भी पढ़ाने की तैयारी है। महाविद्यालयों में भारतीय व विदेशी भाषा का सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम छह माह का होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्वशासी कॉलेजों व उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को नोडल केंद्र बनाया गया है। विभाग ने पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए समिति बनाई गई है। समिति सभी भाषाओं के पाठ्यक्रम को 30 जनवरी तक तैयार कर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को उपलब्ध कराएंगे।
बता दें, कि प्रदेश के 15 विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं ने भारतीय भाषा के चयन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग को अनुशंसा भेजी थी। इसके आधार पर भाषा आवंटित की गई है। अधिकारियों का मानना है कि भारतीय व विदेशी भाषाओं के महत्व को समझने और देश व विदेश के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भाषाओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करने के लिए शुरू की जा रही है।
प्रदेश के महाविद्यालयों में इन भारतीय भाषाओं को पढ़ाया जाएगा। इसमें पढ़ाई तेलुगू, तमिल, कन्नड, मराठी, मलयालम, संस्कृत, सिंधी, मणिपुरी, उड़िया, असमी, बांग्ला, पंजाबी, गुजराती पढ़ाई जाएगी।
वहीं महाविद्यालयों में जर्मन, फ्रेंच, रशियन, कोरियन, स्पेनिश व मेंडरिन, जैपनीज जैसी सात विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। इसके लिए विशेषज्ञ रखे जाएंगे।
विद्यार्थी को एक भाषा के लिए 500 रुपये शुल्क देना होगा। 60 घंटे का पूरा पाठ्यक्रम होगा। इसकी कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जाएगी। इसकी परीक्षा भी होगी। प्रत्येक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चार क्रेडिट का होगा।
मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बनने वाला है, जो सोशल इंपैक्ट बान्ड लाने की तैयारी कर रहा है। पहले प्रोजेक्ट में राज्य के 600 ओबीसी वर्ग के युवाओं को जापान और जर्मनी में प्लेसमेंट दिलाया जाएगा। इसका मसौदा पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विभाग ने तैयार किया है। इसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। जैसे ही प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड लागू करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य बन जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के लिए युवाओं की राज्य स्तर पर स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद चयनित युवाओं को नियुक्त एजेंसी ट्रेनिंग देंगी। इसमें स्किल डेवलपमेंट, पर्सनालिटी डेवलपमेंट और जैपनीज, फ्रेंच सहित अन्य विदेशी भाषाओं को सिखाया जाएगा। इसके बाद युवाओं को जापान और जर्मनी भेजकर उनकी स्किल के मुताबिक नौकरी दी जाएगी।
बता दें कि दोनों देशों ने 300-300 पदों की वैकेंसी की जानकारी दी है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम को इस बान्ड में पार्टनर बनाया गया है। इस योजना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। पहले प्रोजेक्ट में 20 करोड़ का बजट होगा।
प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं नए सत्र से शुरू की जाएगी। साथ ही सात विदेशी भाषा का पाठ्यक्रम भी शुरू होगा। यह सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम होगा- अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा।