MP के बड़े शहरों में 'जहर' बन रहा पानी, अमृत 2.0 पर 5142 करोड़ खर्च, फिर भी जनता को नसीब नहीं शुद्ध जल
Indore water tragedy: मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि उपलब्ध कराई ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 06 Jan 2026 06:20:33 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Jan 2026 06:20:33 PM (IST)
MP के बड़े शहरों में 'जहर' बन रहा पानी।HighLights
- अमृत 2.0 पर हुए 5142 करोड़ खर्च
- फिर भी जनता को नसीब नहीं शुद्ध जल
- इंदौर त्रासदी ने दावों की पोल खोल दी
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि उपलब्ध कराई लेकिन यहां के नगरीय निकाय लोगों को शुद्ध पानी नहीं दे सके। अमृत 2.0 (अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0) योजना के तहत पेयजल आपूर्ति पर 5,142 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, फिर भी दूषित जल से इंदौर में 17 लोगों की मौत अलग ही कहानी कह रही है।
पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन
इन शहरों में जमीन के नीचे बिछी वर्षों पुरानी पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन है। कहीं-कहीं तो पेयजल की लाइन नाले-नालियों से होकर गुजर रही है। चार साल पहले शुरू हुई अमृत 2.0 योजना के तहत न तो जलप्रदाय का काम पूरा हुआ और न ही सीवरेज परियोजनाएं पूरी हो पाई हैं। इस वर्ष अमृत 2.0 की समयावधि समाप्त हो जाएगी लेकिन काम की गति को देखकर नहीं लगता कि इस वर्ष लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।
अमृत 2.0 योजनाः एक नजर में
एक अक्टूबर, 2021 से प्रारंभ, अवधि पांच वर्ष
प्रदेश के समस्त 413 नगरीय निकाय एवं पांच छावनी परिषद सम्मिलित
ये कार्य लंबित
4585.91 करोड़ रुपये के 253 जलप्रदाय के कार्य
205.88 करोड़ रुपये के 273 वॉटर बॉडी रिजुविनेशन के कार्य
52.11 करोड़ रुपये के हरित क्षेत्र विकास के कार्य
1941.72 करोड़ रुपये के सीवरेज के कार्य
ये कार्य पूर्ण
29.88 करोड़ रुपये के जलप्रदाय के आठ कार्य
66.69 करोड़ रुपये के वाटर बाडी रिजुविनेशन के 118 कार्य
39.07 करोड रुपये के हरित क्षेत्र विकास के 182 कार्य
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बड़े शहरों का यह है हाल
- इंदौर: नगर निगम ने 550 किमी पुरानी पेयजल लाइन को चिह्नित कर बदलने की योजना अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत बनाई लेकिन अभी तक इस कार्य के लिए कोई एजेंसी निर्धारित नहीं की गई है। इसी तरह पाइप लाइन और टंकी निर्माण के तीन पैकेज के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें भी एजेंसी का चयन नहीं किया जा सका है।
- जबलपुर: शहर में 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइन नाले-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही है। पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की उम्र 40 से 50 वर्ष तक हो चुकी है। सालों से लगातार नाली-नालियों के क्षारीय पानी, धूल, मिट्टी के संपर्क में रहने से पाइपलाइनों में क्षरण चुका है। जिससे जल वितरण पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदगी घुल रही है।
ग्वालियर: जिले के ग्रामीण अंचल में करीब 410 नल-जल योजनाओं में से 115 ही चालू हैं। पानी के ट्रीटमेंट के लिए क्लोरीन डालने का प्रावधान है, लेकिन पंचायत स्तर पर इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
उज्जैन: जिले में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 569 नल-जल योजनाओं में से 561 योजनाएं पूर्ण बताई जा रही हैं, जबकि 489 योजनाओं का पंचायतों को हस्तांतरण हो चुका है। इसके बावजूद कई गांवों में नियमित जल सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना की देरी से जिले के 914 गांवों को नर्मदा जल मिलने में कम से कम एक साल और लगेगा। तकनीकी बाधाएं और अधूरा टी-कनेक्शन कार्य मिशन की गति पर भारी पड़ रहा है।
देवास: जिले में जल जीवन मिशन के तहत 645 एकल ग्राम योजना में से 418 योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जा चुकी हैं। इन कार्यों में भी ठेकेदारों द्वारा लेटलतीफी की गई। गुणवत्ताहीन कार्य की शिकायतें आई। अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण योजना अब तक पूर्ण नहीं हो सकी।