.webp)
नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर : इंदौर में दूषित जल से हुई लगातार मौतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर की नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में जल सुनवाई आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद मंगलवार को नगर पालिका छतरपुर में पहली बार जल सुनवाई का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली इस सुनवाई में लोग पानी से जुड़ी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे।
जल सुनवाई में कई नागरिक बोतलों में कुएं और हैंडपंप का पानी लेकर पहुंचे। सहायक इंजीनियर की मौजूदगी में मौके पर ही पानी की जांच कराई गई। जांच में एक कुएं का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। टीडीएस जांच में इसकी मात्रा साढ़े चार सौ पाई गई। वहीं, टंकियों से घरों तक पहुंच रहे पानी की जांच की गई तो उसमें टीडीएस की मात्रा करीब डेढ़ सौ पाई गई, जो मानकों के अनुरूप बताई गई।
जल सुनवाई में पहुंचे नागरिकों ने बताया कि उनके क्षेत्रों में कई दिनों से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। संतोष कुमार सोनी ने बताया कि सोमवारी बाजार क्षेत्र में छह दिन से पानी नहीं पहुंच रहा है और शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। सत्यनारायण ने शासकीय प्राथमिक शाला के पास खराब हैंडपंप को सुधारने की मांग की, क्योंकि कई परिवार उसी पर निर्भर हैं।
वहीं, वीके जैन ने शिकायत की कि उनके नल कनेक्शन में पिता का नाम गलत दर्ज कर दिया गया है, जिसे सही कराया जाना चाहिए। कुछ लोग ऐसे भी पहुंचे जिनके घरों में नल कनेक्शन नहीं हैं, लेकिन उन्हें पानी के बिल थमाए जा रहे हैं।
हैंडपंप से गंदा पानी आने की शिकायत पर नगर पालिका की ओर से एक टीम को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जांच के बाद आवश्यक सुधार कार्य किए जाएंगे।
पहली जल सुनवाई में व्यवस्थाओं की कमी भी सामने आई। नगर पालिका परिसर में बैनर और पोस्टर नहीं लगे होने के कारण लोग यह पूछते नजर आए कि जल सुनवाई कहां आयोजित हो रही है। इसे लेकर खानापूर्ति जैसी स्थिति भी दिखाई दी। पहले दिन नगर पालिका छतरपुर में करीब एक दर्जन शिकायतें दर्ज की गईं।
छतरपुर के साथ-साथ बड़ामलहरा, नौगांव, खजुराहो सहित अन्य नगर परिषदों में भी जल सुनवाई आयोजित की गई, जहां लोग पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं लेकर पहुंचे।
पीएचई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिलेभर से लिए गए पानी के सैंपलों की जांच पीएचई की लैब में 11 से 13 पैरामीटर के आधार पर की जाती है। इनमें टीडीएस, पानी का पीएच, क्लोरीन की मात्रा आदि शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक की जांच में पानी दूषित नहीं पाया गया है, हालांकि लंबे समय से बंद पड़े हैंडपंपों में पानी खराब आ सकता है।
जल प्रदाय प्रभारी गोकुल प्रजापति ने बताया कि नपा परिसर में जल सुनवाई आयोजित की गई, जहां नागरिकों द्वारा लाए गए पानी के सैंपलों की मौके पर जांच की गई। हैंडपंप खराब होने की शिकायत पर टीम को जांच के लिए भेजा गया और एक कुएं का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया।
यह भी पढ़ें- बड़े तालाब पर ‘Khelo MP’ का आगाज: लेजर शो और आतिशबाजी के साथ प्रदेश के सबसे बड़े खेल महाकुंभ का CM ने किया शुभारंभ