
नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। मकर संक्रांति पर चाइनीज मांझा के साथ पतंगों का उड़ना आमजन के साथ परिंदों के लिए भी खतरनाक साबित होता रहा है। बाजार में दुकानदार चोरी छिपे चाइनीज मांझा बेच रहे हैँ। मामले को लेकर जब नईदुनिया ने प्रदेशस्तर पर चाइनीज मांझा को लेकर अभियान चलाया तो प्रदेश के साथ छतरपुर में भी पुलिस प्रशासन अलर्ट नजर आया। छतरपुर पुलिस की टीमें दुकानदारों के पास पहुंची और चाइनीज मांझा तो नहीं बेचा जा रहा इसे लेकर जांच पड़ताल की गई। एसपी अगम जैन ने जिलेभर में चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध लगाते हुए एडवाइजरी भी जारी कर दी है। अगर कोई चाइनीज मांझा बेचता पाया गया या खरीदता पाया गया तो तत्काल कार्रवाई होगी।
सूचना मिलने पर बिजारपुर पुलिस ने एक दुकानदार से पांच चाइनीज मांझा जब्त किए थे जिसके खिलाफ कार्रवाई भी की गई। बुधवार को भी मकर संक्रांति को देखते हुए पुलिस की टीमें दुकानों पर जांच पड़ताल करती रहीं। छतरपुर पुलिस ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बेचे जाने के संबंध में सूचना देने के लिए पुलिस हेल्पलाइन नंबर 7049101021 भी जारी किया है। जिस पर सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। बॉक्स पतंगों में उलझे चाइनीज धागे बता रहे बेचा जा रहा मांझा मकर संक्रांति के पहले से ही पतंगों का उड़ना शुरू हो जाता है।
बच्चे और बड़े एक दूसरों की पतंगों को काटने के चक्कर में प्लास्टिक का चाइनीज मांझा खरीद लाते हैं और उससे पतंगें उड़ाते हैं जो अब प्रति तरह से प्रतिबंधित हैं। पेड़ों पर टंगी पतंगों में लगा चाइनीज मांझा देखकर कहा जा सकता है कि अभी भी चाइनीज मांझा बिक रहा है। हालांकि पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। छतरपुर पुलिस ने अपील की है कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा का न तो विक्रय करें और न ही इसका उपयोग करें। ऐसा करना दंडनीय अपराध है, जिससे आम नागरिकों सहित पशु-पक्षियों के जीवन को खतरा उत्पन्न होता है।
चाइनीज मांझा में फंसा उल्लू पेड़ की टहनियों में लटका मिला शहर में एक कुत्ते की समझदारी और विभागीय तत्परता के चलते एक दुर्लभ विशाल उल्लू को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया। दरअसल शहर की एक आवासीय कॉलोनी में चाइनीज मांझे की चपेट में आकर यह उल्लू लगभग 50 फीट की ऊंचाई पर एक पेड़ की टहनियों में बुरी तरह उलझ गया था, जिसे समय रहते स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक टीम के संयुक्त प्रयासों से बचा लिया गया। टहनियों में फंसा उल्लू आजाद होने के लिए पंख फडफ़ड़ा रहा था, लेकिन धारदार मांझा उसके शरीर में और गहरा धंसता जा रहा था।