
नईदुनिया न्यूज, तेंदूखेड़ा। नगर से तीन किमी दूर से जंगली एरिया लग जाता है और लगभग सैकड़ों ग्राम ऐसे हैं जो पूरी तरह जंगल से लगे हुए बसे है। अब पिछले एक साल से इन जंगलों में जंगली जानवरों की भरमार बन गई है। सीमित जगह होने के कारण यदि यह जानवर जंगल में एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं तो निश्चित इनको पहले रहवासी ग्रामों से होकर आना-जाना पड़ता है। इसकी पुष्टि वन विभाग के अधिकारी भी करते हैं। बाघ गणना के दौरान मांसाहारी जानवर में सबसे बड़े जानवर के रूप में तेंदुआ होना प्रतीक हुआ है, इसके अलावा बाघ छोड़ बाकी सभी जंगली जानवरों का क्षेत्र में बसेरा है।
यह जानवर एक ओर जगह क्षेत्र को शोभा बढ़ा रहे हैं तो दूसरी ओर रहवासियों को मुसीबत भी बने हैं। तीन दिन पहले एक कुएं में जंगली सूअर गिर गया था, जिसको वन अमले ने रेस्क्यू करके सुरक्षित निकला। अब बुधवार को दो नए मामले सामने आए हैं। एक मामले में जंगली जानवर को भगाने रखे गए औजार से गाय जख्मी हो गई वही दूसरे मार्ग पर राहगीरों को तेंदुआ दिखाई दिया। वन विभाग को सूचना मिलते ही ग्रामों में रहवासियों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने मुनादी करानी शुरू कर दी।
किसानों के खेतों में लगी फसल को जंगली सूअर नुकसान पहुंचते कुछ किसान इन सूअरों से छुटकारा पाने के लिए कई तरह के उपाय किए है, किंतु वह उपाय एक गाय के लिए मुसीबत बन गया। मामला ग्राम बम्होरी से सामने आया है, यह अज्ञात लोगों ने जंगली सूअर को भागने के लिए बम रखे थे, किंतु उसको गाय ने खा लिया और मुंह के अंदर बम फट गया। गाय बुरी तरह जख्मी हो गई। घटना की सूचना बम्होरी पूर्व सरपंच संतोष यादव को लगी, उन्होंने तेंदूखेड़ा गोशाला से वाहन मंगवाया और जख्मी हालत में गाय को इलाज के लिए दयोदय गोशाला भेजा। पूर्व सरपंच संतोष यादव ने बताया कि बम्होरी के ऊपर जंगली क्षेत्र में तेज बम फेंके गए है, एक गाय ने वहीं बम मुंह में खाया और वह फट गया, गाय का पूरा मुंह फट गया खून से लथपथ गाय को गोशाला भेजा गया है।
यहां पर तेंदुआ की संख्या ज्यादा है। पहले सैलवाडा सर्किल में तेंदुआ दिखे उसके बाद तारादेही मार्ग पर फिर झलोन रेंज के सिमरिया में एक घर में घुसा उसके पदमार्ग दिखे, एक बछड़े का शिकार किया अब बगदरी और कंसा के समीप तेंदूखेड़ा एक सप्ताह से डेरा डाले हैं। तेंदूखेड़ा निवासी संजू चक्रवती सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि तीन दिन पहले बगदरी ट्रैक्टर लेकर ईंट उठाने गया था। दोपहर का समय था। मेरे साथ कई लोग थे अचानक मवेशी कुत्ते आवाज करते भागे एक लकड़हारा भी भय से कांपता हुआ आया।
उसने बताया कि जंगल में शेर है किंतु कुछ ही समय में वहां से पूरे शरीर में दाग वाला जानवर निकला। वह गुलबाघ जिसको तेंदुआ कहते है वह था। इसी तरह बुधवार को दमोह मार्ग पर कंसा के समीप कुछ तारादेही के राहगीरों को सड़क किनारे एक तेंदुआ दिखाई दिया। कुछ और राहगीरों ने सड़क पार करते हुए देखा मामला इंटरनेट मीडिया पर आया। यह पूरा क्षेत्र तेंदूखेड़ा, तेजगढ़ वन परिक्षेत्र की वीट में आता है।
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तेंदुआ की पुष्टि होने के बाद तेजगढ़ वन परिक्षेत्र के स्टाप ने मुनादी कराई थी, कंसा सहित आसपास के ग्राम में जाकर लोगों को तेंदुआ होने की पुष्टि कराते हुए ग्रामीणों को बताया कि आप लोग रात्रि में खेतों में न सोएं, अकेले आवागमन न करें। वीटगार्ड सत्यम नायक ने कहा कि तेंदुआ दिखने के बाद तत्काल मुनादी कराई गई है, जंगल में तेंदुआ है और लोगों को जंगल न जाने की हिदायत दी है। खेतों में रात्रि में न जाए इसको लेकर भी जागरूक किया गया है।