
नईदुनिया प्रतिनिधि, दतिया। कृषि उपज मंडी दतिया में धान की आवक बढ़ने के साथ ही अब उसके दामों को लेकर किसानों और व्यापारियों के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। किसानों का आरोप है कि मंडी में व्यापारियों द्वारा धान के भाव में मनमाने तरीके से कटौती की जा रही है। कुछ मामलों में दाम एक हजार रुपये तक गिराए जाने से किसानों में नाराजगी है। अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशान किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है।
किसानों का कहना है कि वे महीनों की मेहनत, खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद फसल मंडी में बेचने पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां अपेक्षित भाव नहीं मिलने से उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर व्यापारी लो क्वालिटी की धान के परिवहन संबंधी दिक्कतों और कारोबार की परिस्थितियों का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में मंडी में धान की खरीदी को लेकर किसानों और व्यापारियों के बीच असहमति बढ़ती दिखाई दे रही है।
मंडी में इन दिनों अच्छी मात्रा में धान पहुंच रही है। लाइसेंसधारी गल्ला व्यापारी किसानों से उपज खरीदकर उसे दूसरे स्थानों पर भेज रहे हैं। धान के दामों में गिरावट की शिकायतों के बीच किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि जब मंडी में बड़ी मात्रा में उपज पहुंच रही है, तब उन्हें प्रतिस्पर्धी भाव मिलने के बजाय कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों के मुताबिक, धान के भाव में अचानक बड़ी कटौती होने से उनकी पूरी फसल का हिसाब बिगड़ जाता है। मंगलवार को दतिया कृषि उपज मंडी में इसे लेकर किसानों ने नाराजगी जाहिर की। किसानों के विरोध को देखते हुए मौके पर संबंधित अधिकारी भी पहुंचे। जिसके बाद किसानों को किसी तरह समझाया जा सका।
कृषि उपज मंडी में 3800 से लेकर 4250 तक धान की खरीदी की जा रही है। इस मामले में व्यापारियों का कहना है कि ऐसे में निम्न क्वालिटी की नमी वाली धान भी मंडी में बेचने आ रहे किसान इसी मूल्य पर अपनी धान बेचना चाहते हैं। जिसे उच्च दाम पर खरीदना घाटे का सौदा है। इसलिए धान की क्वालिटी के हिसाब से दाम लगाए गए थे।
दामों में करीब एक हजार रुपये तक की गिरावट देख किसान भड़क गए। वह अपनी शिकायत लेकर मंडी कार्यालय पहुंचे। विरोध प्रदर्शन देख मंडी कर्मचारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने धान से भरी ट्रैक्टर ट्रालियों में उपज की गुणवत्ता खुद जांची। किसानों का कहना था कि फसल बेचते समय भाव में बड़ी कटौती से उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ता है।
इधर भांडेर कृषि उपज मंडी में व्यापारी और पुलिस के बीच उपज परिवहन का मुद्दा भी विवाद का कारण बना हुआ है। धान वजन में हल्की होने के कारण ट्रकों पर लदान के दौरान बोरों की ऊंचाई अधिक हो जाती है। इससे सड़क पर हादसे की आशंका को देखते हुए भांडेर थाना प्रभारी निरीक्षक सपना शर्मा ने हाल ही में कुछ ट्रकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई का गल्ला व्यापारियों ने विरोध किया और मंडी सचिव से हस्तक्षेप करने की मांग की।
व्यापारियों का कहना था कि यदि ट्रकों पर इसी तरह कार्रवाई जारी रही तो खरीदी के मौसम में मंडी का कारोबार प्रभावित हो सकता है। इस मामले में मंडी सचिव दीपचंद ने थाना प्रभारी भांडेर को पत्र लिखकर मंडी से होने वाले उपज परिवहन के दौरान ट्रकों पर चालानी कार्रवाई स्थगित करने की मांग की।
सचिव के अनुसार, थाना प्रभारी ने पत्र लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि कार्रवाई से मंडी कारोबार प्रभावित होने के आरोप के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं। इस पर दीपचंद का कहना था कि वह व्यापारियों से चर्चा करेंगे और उनके पास कोई साक्ष्य उपलब्ध होने पर पुलिस को देंगे।
थाना प्रभारी सपना शर्मा ने बताया कि मंडी सचिव से केवल यह प्रमाण मांगा गया है कि पुलिस की कार्रवाई किस आधार पर गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा और जान-माल की रक्षा प्राथमिकता है। नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई जारी रहेगी।
व्यापारियों की आशंका है कि परिवहन में परेशानी आने पर खरीदी और माल भेजने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। ऐसे में व्यापारियों और पुलिस के बीच नियमों के पालन तथा परिवहन व्यवस्था को लेकर सहमति बनना जरुरी है।
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