
नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी में स्वास्थ्य विभाग में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने के बाद अब ईओडब्ल्यू जबलपुर टीम ने जिला मुख्यालय में दो दिन से डेरा डाल दिया है। स्वास्थ्य विभाग में हुए 60 लाख 65 हजार 590 रुपये के वित्तीय घोटाले की अब ईओडब्ल्यू जांच करेगी। कलेक्टर ने इस मामले में गत दिनों तत्कालीन सीएमएचओ को नोटिस देने के साथ दो कर्मचारियों को निलंबित भी किया था।
गौरतलब है कि मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ कार्यालय डिंडौरी में वर्ष 2017 से 2024 के बीच बड़ी अनियमितता और अधिक भुगतान का मामला जांच में उजागर हुआ था। कार्यालय आयुक्त कोष व लेखा भोपाल द्वारा नवंबर 2025 को ही संदिग्ध भुगतानों की सूची कलेक्टर डिंडौरी को भेजी गई थी। इसके बाद कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया द्वारा बनाई गई जांच टीम ने भी इस बड़ी वित्तीय अनियमितता को पकड़ा था।
ईओडब्ल्यू के डीएसपी स्वर्णजीत सिंह धामी दो दिन से डिंडौरी में ही अपनी टीम के साथ रहकर इसी अनियमितता से जुडे दस्तावेज एकत्रित करने में जुटे हुए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में भी हडकंप की स्थिति है। विस्तृत जांच से इस खेल में शामिल कई और बडे चेहरे बेनकाब होंगे।
कलेक्टर ने इस मामले में तत्कालीन सीएमएचओ रहे और वर्तमान सिविल सर्जन जिला अस्पताल डॉ. रमेश मरावी को वसूली का नोटिस आठ अक्टूबर को जारी किया था। मरावी को सात दिन के अंदर जवाब देना था। इसी के साथ कलेक्टर ने सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ लिपिक गुलाब साहू और एक सुपरवाइजर प्रकाश सिंह परस्ते को निलंबित करने के आदेश जारी किए थे।
इसके साथ ही अनियमितता की इस अवधि में कार्यरत रहे डॉ. बलदेव सिंह भलावी, डॉ. भरत सिंह तेकाम व तत्कालीन सीएमएचओ रहे डॉ. आरके मेहरा पर भी कार्यवाही की बात कही थी। यद्यपि डॉ. भलावी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, डॉ. तेकाम की मौत हो चुकी है और तत्कालीन सीएमएचओ रहे डॉ. आरके मेहरा इस जिले से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं।
डॉ. मेहरा की भूमिका पर भी बडे सवाल खडे हो रहे हैं। उन पर भी कडी कार्यवाही की मांग उठ रही है। वे भी अनियमितता के समय लंबे समय तक पदस्थ थे। उनकी भूमिका पर बडे आरोप लग रहे हैं। ईओडब्ल्यू की विस्तृत जांच में अन्य अनियमितताएं भी उजागर हो सकती हैं।
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इधर शिकायत मिलने पर ईओडब्ल्यू ने इस मामले में प्रकरण दर्ज कर अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू डीएसपी की अगुवाई में टीम घोटाले के दस्तावेज एकत्रित करने में जुटी है। बताया जा रहा है कि दो तत्कालीन सीएमएचओ की भूमिका पर इस मामले में गंभीर सवाल उठे हैं।
आदेश में उल्लेख किया गया कि डॉ. रमेश मरावी 22 मार्च 2021 से 14 अगस्त 2025 तक प्रभारी सीएमएचओ के पद पर कार्यरत थे। उनके द्वारा आईएफएमआईएस में सत्यापित करने की भूमिका थी। आरोप है कि उन्होंने विभिन्न देयकों व एरियर भुगतानों को बिना उचित परीक्षण, बिना पात्रता देखे और बिना पूर्व भुगतान के मिलान के ही अनुमोदित कर दिया। यह राशि उनसे वसूल की जाएगी।