
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भोपाल के गोविंदपुरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर बने 40 पासपोर्ट दलाल नसीम अख्तर की मदद से बने। अब एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
नसीम से पूछताछ में सामने आया है कि ग्वालियर और बैतूल से बने 15 पासपोर्ट के आवेदन भी उसने ही भोपाल से करवाए थे। उसी ने पूरी सांठगांठ की। इसके बाद बगैर गहन जांच पड़ताल के आवेदन आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ा दिए गए।
नसीम अख्तर को पुलिस लेकर गोविंदपुरा में अन्नानगर स्थित उसके कार्यालय भी लेकर गई थी, उसके घर की भी एक टीम ने तलाशी ली। इस दौरान कुछ रिकॉर्ड एसटीएफ की टीम को मिला है, जिसकी पड़ताल जारी है। नसीम से पूछताछ में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।
अब तक उसने भोपाल के 40 और नागपुर के पते पर बने 15 पासपोर्ट का राज उगला था। अब उसके तार ग्वालियर के डबरा में बौद्ध विहार के पते पर बने पासपोर्ट और बैतूल से बने पासपोर्ट से भी जुड़ गए हैं। दोनों जिलों के 15 पासपोर्ट बनवाने में उसका ही हाथ है।
भोपाल कर्मचारी की मदद से ग्वालियर में साठगांठ
ग्वालियर से 17 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बने थे। यह सभी डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर बने थे। पूछताछ में सामने आया है कि भोपाल में पासपोर्ट सेवा केंद्र में 2022-2023 में पदस्थ रहे एक कर्मचारी की अहम भूमिका थी। जिससे नसीम अख्तर की नजदीकी थी, उसी ने साठगांठ कराई थी।
जिसके चलते यहां भी पासपोर्ट सेवा केंद्र में बारीकी से जांच पड़ताल नहीं हुई। इसके चलते आसानी से आवेदन होने के बाद साक्षात्कार फिर पासपोर्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ गई।
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पुलिस सत्यापन में फार्म में छह बिंदु, जांच में बरती गई लापरवाही
इस मामले में सामने आया है कि ग्वालियर और भोपाल के गोविंदपुरा में पुलिस सत्यापन में जो लापरवाही बरती गई, वह सत्यापन फार्म में सबसे ज्यादा बरती गई। इसमें छह बिंदु आते हैं। इनके आधार पर ही सत्यापन किया जाता है।
किस जांच में कौन-सा दस्तावेज लगाया, किससे बात की, गवाह कौन? यह सब बारीकी से लिखना पड़ता है। फार्म तो भरे गए, लेकिन जांच में लापरवाही बरती गई।
भोपाल के एजेंट ने ग्वालियर और बैतूल से बने कुछ पासपोर्ट के लिए भी आवेदन किया था। उसका संपर्क भोपाल में पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी से था। जिससे आवेदन के बाद गहनता से जांच नहीं की गई। राहुल लोढ़ा, डीआईजी, एसटीएफ
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