
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। देशभर में दूध बेचने वाली ब्रांडेड कंपनियां पूरे प्रदेश में तो कम कीमत पर दूध बेचती हैं, लेकिन ग्वालियर में इसी दूध के प्रति लीटर दो रुपये अधिक वसूलती हैं। यह तथ्य तब सामने आया जब अभी हाल ही में ग्वालियर दुग्ध संघ ने अपने ब्रांड सांची दूध के दाम दो रुपये बढ़ा दिए। पहले सांची दूध 68 रुपये प्रति लीटर था और अब 70 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। हालांकि दुग्ध संघ का तर्क है कि अन्य कंपनियों की दरों के बराबर करने के लिए रेट बढ़ाए गए हैं।
इसकी वजह यह है कि अन्य ब्रांडेड कंपनियां प्रदेश के अन्य शहरों व क्षेत्र में 68 रुपये प्रति लीटर दूध बेच रही थी, जबकि ग्वालियर व चंबल में 70 रुपये प्रति लीटर बेच रही हैं। यहां बता दें कि ग्वालियर दुग्ध संघ ने सांची फूल क्रीम दूध की कीमत में दो रुपये की बढ़ोतरी कर दी, जबकि इस ब्रांड का दूध भोपाल, इंदौर, उज्जैन व जबलपुर में 68 रुपये ही बिक रहा है, लेकिन ग्वालियर-चंबल अंचल में यह कीमत 70 रुपये प्रति लीटर हो गई।
इस संबंध में दुग्ध संघ के प्रबंधन का कहना है कि सांची का दूध कम रेट में था, इसलिए अन्य कंपनियां ग्राहकों को बताती थी कि सांची दूध में कमी है इसलिए ही तो वह 68 रुपये में बिक रहा है। इसलिए सांची दूध की दरों को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से निर्देश मिलने के बाद सभी कंपनियों के बराबर कीमत करने के लिए दरों को बढ़ाया गया है।
मध्य प्रदेश में सबसे अधिक दूध का उत्पादन ग्वालियर-चंबल ही करता है। ये कंपनियां अंचल के किसानों से कम कीमत पर दूध लेकर अंचल के ही लोगों को महंगी दरों पर बेच रही है, जबकि अंचल के लोगों को दूध प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कम कीमत पर मिलना चाहिए था।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के शहरी क्षेत्रों में सांची के अलावा देश की सबसे बड़ी दूध कंपनी अमूल, मदर डेयरी, डिलाइट इंडिया, पारस आदि कपंनियां दूध बेच रही हैं। खास बात यह है कि ये सभी नामी गिरामी कंपनियां अंचल के लोगों के साथ भेदभाव कर रही हैं। प्रदेश के अन्य शहरों के लोगों को दो रुपये कम व अंचल के लोगों से दो रुपये अधिक वसूल रही है। इसके पीछे बताया जाता है कि यहां कंपनियों ने दूध की दरें दिल्ली एनसीआर की ही तरह ही रखी हैं।
अंचल में अमूल, डिलाइट इंडिया, पारस, मदर डेयरी आदि अपना दूध बेच रही है। इन सभी के दूध की रेट प्रदेश के अन्य शहरों में 68 रुपये ही है। हालांकि सात जनवरी से पहले सांची अंचल में 68 रुपये प्रति लीटर में ही दूध बेच रही थी, लेकिन अन्य कंपनियां महंगा बेच रही थी। कम दर होने से हमारे प्राडक्ट को दूसरी कंपनियों के लोग उपभोक्ताओं के सामने गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे थे। इसलिए अन्य कंपनियों की दरों के बराबर ही सांची की दरें करने का निर्णय लिया गया है। - राशिद खान, सीईओ, ग्वालियर दुग्ध संघ (सांची)।