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नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर जहां एक तरफ तरक्की की नई इबारत लिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह साइबर अपराधियों के हाथ में एक खतरनाक हथियार बन गया है।
डिजिटल ब्लैकमेलिंग का खेल तेजी से फैल रहा है, जिसमें एआई टूल्स का दुरुपयोग कर आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और युवाओं की डीपफेक अश्लील तस्वीरें- वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद इन्हें इंटरनेट मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देकर भारी-भरकम रकम वसूली जा रही है। ऐसे पांच मामले पिछले तीन माह में सामने आए हैं।
केस 1: बहोड़ापुर में ब्लैकमेलिंग का मामला
बहोड़ापुर इलाके में रहने वाले ट्रांसपोर्टर की बेटी ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में पढ़ाई कर रही है। छह माह पहले ही वह यहां पढ़ाई करने गई। उसकी इंस्टा प्रोफाइल से फोटो निकालकर न्यूड तस्वीरों में बदला गया। इसके बाद उनकी बेटी के मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट हैक कर ली गई।
जितने भी नंबर थे, उन सभी नंबर पर यह तस्वीर भेजी गई। 28 सितंबर को साइबर क्राइम विंग में ट्रांसपोर्टर ने शिकायत की। पड़ताल में सामने आया- यह सारा मामला फिशिंग लिंक के जरिये हुआ। एक अंजान लिंक पर क्लिक करने के बाद मोबाइल की गैलरी, कांटेक्ट लिस्ट, इंटरनेट मीडिया अकाउंट का एक्सेस हैकर के पास पहुंच गया।
केस 2: थाटीपुर का मामला
अगस्त माह में ग्वालियर के थाटीपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। 24 वर्षीय युवती के फेसबुक, इंस्टाग्राम अकाउंट में सेंध लगाकर हैकर ने फोटो निकालीं। इनकी न्यूड फोटो बनाईं। इन्हें युवती के घर लिफाफे में भेजा और एक लाख रुपये की मांग की। पुलिस ने आइटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया।
केस 3: डबरा में सामने आया मामला
ग्वालियर के डबरा में 25 सितंबर को दो नाबालिग बहनों के फोटो इंटरनेट मीडिया से निकाले। इन्हें एआई के जरिये न्यूड फोटो में बदलकर बहुप्रसारित कर दिया। इस मामले में पुलिस ने एफआइआर दर्ज की है।
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टेलीग्राम बना अवैध ऐप्स का अड्डा
साइबर क्राइम विंग और राज्य साइबर सेल की जांच में यह बात सामने आई है कि इस तरह की वारदात को अंजाम देने वाले ज्यादातर फर्जी और अनधिकृत ऐप्स गूगल प्ले स्टोर या एप्पल के ऐप स्टोर के बजाय सीधे टेलीग्राम चैनल्स के माध्यम से डाउनलोड कराए जा रहे हैं। ये ऐप्स चंद सेकंड में किसी भी सामान्य तस्वीर को मार्फ कर उसे आपत्तिजनक रूप देने में सक्षम हैं।
तस्वीरों की चोरी: अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक या लिंक्डइन) से लोगों की आम तस्वीरें और प्रोफाइल पिक चुराते हैं।
एआई का इस्तेमाल: डीपफेक और मॉर्फिंग तकनीक वाले इन विशेष ऐप्स की मदद से उन तस्वीरों को अश्लील वीडियो या फोटो में बदल दिया जाता है।
धमकी और वसूली: इसके बाद अपराधी पीड़ित को व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स पर वो फर्जी कंटेंट भेजकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं और परिजनों व दोस्तों को भेजने की धमकी देकर पैसों की मांग करते हैं
साइबर एक्सपर्ट क्या कहते हैं...
कभी भी अंजान लिंक पर क्लिक न करें। कोई भी अंजान फाइल व्हाट्स एप या अन्य मैसेंजर पर डाउनलोड न करें। टेलीग्राम पर कोई अंजान समूह में जोडे तो तुरंत लेफ्ट हो जाएं। हर एक्टिविटी की जानकारी इंटरनेट मीडिया पर साझा न करें। इसे सिर्फ फ्रेंड के लिए ही ओपन रखें और डिजिटल दोस्ती सिर्फ उन्हीं से करें, जिनसे परिचित हैं। यह वह तरीके हैं, जो आपको ऐसे शातिर साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखेंगे। संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, राज्य साइबर सेल
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