
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर के प्रमुख बाजारों में बढ़ते अतिक्रमण और बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर अब न्यायालय में सवाल उठाए गए हैं। महाराज बाड़ा से लेकर दौलतगंज, सराफा और मुरार तक बाजारों में ठेले-गुमटियों के कारण सड़कें सिकुड़ने और आवागमन प्रभावित होने का मुद्दा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ पहुंच गया है।
इस संबंध में मंगलवार को जनहित याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से हाकर्स की सूची और उन्हें जारी की गई रसीदों का रिकार्ड प्रस्तुत करने को कहा है।
याचिका में दावा किया गया है कि कोरोना काल के बाद शहर में ठेले-गुमटियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनकी संख्या 25 हजार से अधिक बताई गई है। आरोप है कि इनके कारण सात मीटर चौड़ी सड़कें सिमटकर महज दो से तीन मीटर रह गई हैं।
इससे वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर निगम ने शहर में नेहरू पार्क, पिंटो पार्क, लक्ष्मण तलैया, इंटक मैदान, हजीरा और विनय नगर सहित 11 हाकर्स जोन विकसित किए हैं। इन स्थानों पर करीब 1470 वेंडरों को व्यवस्थित रूप से बैठाने की व्यवस्था की गई है।
याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब वेंडरों के लिए अलग स्थान निर्धारित हैं तो फिर मुख्य बाजारों और सड़कों पर ठेले लगाकर कारोबार कैसे हो रहा है।
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प्रशासन पर संरक्षण देने के आरोप
दौलतगंज निवासी व्यापारी पुरुषोत्तम जैन ने यह याचिका दायर की है। इसमें नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संरक्षण और अधिकारियों की उदासीनता को भी अतिक्रमण बढ़ने की वजह बताया गया है।
याचिका में महाराज बाड़ा, दौलतगंज, टोपी बाजार, नजरबाग, सराफा, मुरार, हजीरा, शिंदे की छावनी, कंपू रोड, पड़ाव और लक्ष्मीगंज सब्जी मंडी से गोल पहाड़िया तक के क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं। स्मार्ट सिटी के तहत विकसित पैदल यात्री क्षेत्रों और वेंडिंग स्थलों का समुचित उपयोग नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
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