
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भारत में विदेशी विद्यार्थियों को प्रवेश देने को लेकर विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही अब और अधिक बढ़ गई है। केंद्र सरकार द्वारा लागू इमीग्रेशन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विदेशी विद्यार्थियों के पंजीयन और सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर कड़े एवं स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश के सभी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इस बदलाव के अनुसार, यदि कोई विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या उच्च शैक्षणिक संस्था विदेशी विद्यार्थी (जिसमें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्डधारक भी शामिल हैं) को प्रवेश देती है, तो उस विद्यार्थी की संपूर्ण जानकारी प्रवेश के 24 घंटे के भीतर संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीयन कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। यह जानकारी फार्म के माध्यम से शासन द्वारा निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल अथवा मोबाइल एप पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपलोड की जाएगी।
पासपोर्ट एवं वीजा का विवरण, व्यक्तिगत जानकारी (नाम, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, संपर्क विवरण), भारत में निवास का पता, संस्था में प्रवेश की तिथि एवं प्रवेश क्रमांक, पाठ्यक्रम का नाम, अवधि और सेमेस्टर/गैर-सेमेस्टर प्रणाली, शुल्क संरचना, विदेशी क्षेत्रीय पंजीयन कार्यालय में पंजीयन का विवरण, उपस्थिति का विवरण (प्रत्येक छह माह में अपडेट), शैक्षणिक प्रगति एवं परीक्षा परिणाम, विद्यार्थी का सामान्य आचरण, पाठ्यक्रम पूर्ण होने, बीच में छोड़ने अथवा निष्कासन की स्थिति में निकास संबंधी विवरण।
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यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास में रहने वाले विदेशी विद्यार्थियों की सूचना देने के लिए अतिरिक्त प्रपत्र-दो भरना होगा। प्रपत्र केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारतीय इमीग्रेशन कानूनों के पालन एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय-सीमा में सूचनाएं दें। निर्देशों की अनदेखी करने या समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले संस्थानों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।