
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर के अनुबंधित निजी अस्पतालों में मेडिसिन के पैकेज के तहत उपचार के लिए एनएबीएच (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार हास्पिटल्स) प्रमाणपत्र जरूरी होगा।
यह व्यवस्था एक अक्टूबर से लागू होने जा रही है। प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण ग्वालियर के 79 निजी अस्पताल योजना के दायरे से बाहर हो जाएंगे। सरकार के इस निर्णय से निजी अस्पताल संचालकों में चिंता है।
उनका कहना है कि एनएबीएच की प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है और सभी अस्पतालों के लिए तत्काल प्रमाणपत्र हासिल करना आसान नहीं होगा।
इसे लेकर निजी अस्पतालों से जुड़े संगठनों की 27 सितंबर को बैठक प्रस्तावित है। इसमें आगे की रणनीति और सरकार के सामने समय-सीमा में राहत की मांग रखने पर चर्चा की जाएगी।
जिन अस्पतालों में ज्यादा आयुष्मान मरीज, उन्होंने शुरू की तैयारी
नई व्यवस्था के बाद ऐसे निजी अस्पतालों ने एंट्री लेवल एनएबीएच की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनके पास आयुष्मान योजना के तहत ज्यादा पैकेज हैं और बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। निर्धारित शर्त के अनुसार, उन्हें एनएबीएच प्रमाणपत्र हासिल करना होगा।
संगठन करेगा बैठक
नर्सिंग होम संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर राकेश रायजादा ने बताया कि 27 सितंबर को बैठक कर सरकार के निर्णय को लेकर संगठन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। अस्पताल संचालक अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों को सरकार के सामने रखने और आवश्यक समय देने की मांग पर चर्चा करेंगे।
मरीजों पर क्या असर पड़ेगा
एक अक्टूबर से एनएबीएच प्रमाणपत्र की शर्त पूरी नहीं करने वाले संबंधित अस्पताल मेडिसिन पैकेज के तहत आयुष्मान मरीजों का उपचार नहीं कर सकेंगे। ऐसे मरीजों को योजना से जुड़े पात्र अन्य अस्पतालों में उपचार कराना होगा। इससे एनएबीएच प्रमाणपत्र वाले अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ने की संभावना भी रहेगी।