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नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। खेती-किसानी को लाभ का सौदा बनाने और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न सब्सिडी और ऋण योजनाएं चलाई जा रही हैं।
इसके बावजूद ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रमुख जिले आधुनिक कृषि अपनाने के मामले में काफी पीछे छूट रहे हैं, जबकि प्रदेश के अपेक्षाकृत छोटे और दूरदराज के जिले इन योजनाओं का भरपूर लाभ उठा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आधुनिक खेती के विभिन्न घटकों में ग्वालियर जिले की स्थिति काफी निराशाजनक रही है। 2026-27 के लिए आधुनिक खेती के लिए उद्यानिकी विभाग में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए लोन लेने के लिए किसानों ने आवेदन किए हैं।
पॉलीहाउस खेती
पॉलीहाउस या शेडनेट हाउस लगाकर उन्नत सब्जियों का उत्पादन करने की योजना के तहत इस वर्ष ग्वालियर से मात्र दो किसानों ने आवेदन किया है, जबकि राजगढ़ जैसे जिले से 66 किसानों ने आवेदन कर बाजी मारी है।
प्लास्टिक मल्चिंग
फसलों की सुरक्षा और अधिक पैदावार के लिए प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक अपनाने हेतु ग्वालियर में सिर्फ छह, दतिया में पांच और मुरैना में चार किसानों ने आवेदन किए। इसके विपरीत झाबुआ जैसे छोटे जिले में 480 किसानों ने आगे बढ़कर आवेदन किया है।
हाइड्रोपोनिक्स व एयरोपोनिक्स तकनीक
बिना मिट्टी के पानी और हवा में पौधे उगाने वाली इन आधुनिक तकनीकों को अपनाने में भी ग्वालियर जिले से महज दो किसान आगे आए हैं, जबकि रतलाम जिले से 29 किसानों ने इसके लिए आवेदन किया है। आधुनिक तकनीक अपनाने में मालवा के जिले आगे हैं, जबकि ग्वालियर चंबल के जिले पीछे हैं।
विभाग का हर साल का सब्सिडी व मदद देने के लिए जो बजट आता है वह लैप्स हो जाता है। यहां के किसान पारंपरिक फसलों को करने में ही रुचि लेते हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में किसानों ने मल्चिंग विधि से उद्यानिकी फसलों को करना शुरू किया है। धीरे-धीरे ही यहां बदलाव आएगा। एमपीएस बुंदेला, सहायक संचालक, उद्यानिकी