
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: ग्वालियर में तीन साल के मासूम बेटे की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मां ज्योति राठौर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, उसके प्रेमी उदय इंदौलिया को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। यह फैसला थाटीपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में हुई घटना से जुड़ा है, जो परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित रहा।
यह मामला 28 अप्रैल 2023 का है, जो ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय ज्योति राठौर अपने पड़ोसी और प्रेमी उदय इंदौलिया के साथ दो मंजिला मकान की छत पर मौजूद थी।
इसी दौरान ज्योति का तीन वर्षीय बेटा सनी उर्फ जतिन भी छत पर पहुंच गया। उसने अपनी मां को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। अभियोजन का कहना है कि इस बात के उजागर होने के डर से ज्योति घबरा गई।
डर और घबराहट में ज्योति राठौर ने अपने ही बेटे को दो मंजिला मकान की छत से नीचे फेंक दिया। ऊंचाई से गिरने के कारण बच्चे के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ और 29 अप्रैल 2023 को उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता ध्यान सिंह, जो पेशे से पुलिस कांस्टेबल हैं, शुरुआत में इसे एक हादसा मानते रहे।
बेटे की मौत के बाद ज्योति राठौर की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ने लगी। वह रात में डरकर उठ जाती थी और असहज व्यवहार करने लगी। पति को लगा कि वह गहरे सदमे में है, इसलिए उसका इलाज भी कराया गया, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
बाद में ज्योति ने अपने पति को बताया कि उसका मृत बेटा उसे सपनों में दिखाई देता है। इसी डर और मानसिक दबाव में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि बेटे ने उसे और उसके प्रेमी को छत पर देख लिया था और कहीं बता न दे, इस आशंका में उसने यह कदम उठाया।
अदालत ने रिकॉर्ड की गई बातचीत, कबूलनामे और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ज्योति राठौर को दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, प्रेमी उदय इंदौलिया के खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य न मिलने पर न्यायालय ने उसे बरी कर दिया।
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