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ग्वालियर में परंपरा और संस्कार की मिसाल पेश, 41 साल से एक छत के नीचे धड़क रहा है जैन परिवार का दिल...एक छत और एक रसोई

ग्वालियर के शिंदे की छावनी में रहने वाला जैन परिवार ऐसा ही एक जीवंत उदाहरण है, जहां 41 वर्षों से एक ही रसोई, एक ही छत और आपसी आत्मीयता के साए में पूरा...और पढ़ें

By Rakesh VermaEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 09:18:21 AM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 09:19:42 AM (IST)
ग्वालियर में परंपरा और संस्कार की मिसाल पेश, 41 साल से एक छत के नीचे धड़क रहा है जैन परिवार का दिल...एक छत और एक रसोई
संस्कारों की मिसाल पेश कर रहा जैन परिवार, नईदुनिया

HighLights

  1. संस्कार और परंपरा की मिसाल पेश
  2. 41 साल से एक साथ रह रहा परिवार
  3. एक छत के नीचे खुशी से बीत रहा जीवन

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आज के आधुनिक दौर में जहां एकल परिवारों का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और संयुक्त परिवार तेजी से टूटते जा रहे हैं। वहीं कुछ परिवार ऐसे भी होते हैं जो परंपरा, सामंजस्य और आपसी प्रेम की ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है।

ग्वालियर के शिंदे की छावनी में रहने वाला जैन परिवार ऐसा ही एक जीवंत उदाहरण है, जहां 41 वर्षों से एक ही रसोई, एक ही छत और आपसी आत्मीयता के साए में पूरा परिवार हंसी-खुशी जीवन बिता रहा है।

संस्कारों की छांव में बीता बचपन

मामा बाजार निवासी बाबूलाल जैन और महादेवी जैन के घर जन्मी वीना जैन एक बड़े और सुसंस्कारित संयुक्त परिवार की रीढ़ की तरह हैं। पांच बहनों और तीन भाइयों के इस भरे-पूरे परिवार में पली-बढ़ीं वीना को बचपन में दादा-दादी, चाचा और बुआ का भरपूर स्नेह मिला। उनके पिता का चाट का व्यवसाय होने के कारण समाज में उनकी एक अलग और प्रतिष्ठित पहचान थी।


बचपन से ही संयुक्त परिवार के परिवेश में रहने के कारण वीना हमेशा सबकी लाडली रहीं और माता-पिता के संरक्षण में ही उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

विवाह के बाद मिला एक और विशाल परिवार

आज से 41 वर्ष पूर्व वीना का विवाह ग्वालियर के शिंदे की छावनी निवासी शासकीय सेवारत स्वर्गीय लाला राम जैन के चौथे पुत्र विनोद जैन के साथ हुआ। विवाह के बाद जब वह वधू बनकर ससुराल आईं, तो उन्हें ससुर लाला राम और सास रामकली जैन के अलावा एक विशाल और स्नेहिल परिवार का आंचल मिल गया।

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ससुराल में तीन जेठ-जेठानी, एक देवर और एक ननद का यह बड़ा परिवार उनके लिए पूरी दुनिया बन गया। जेठ सगुन चंद, प्रमोद जैन और प्रभात जैन ने उन्हें सगे भाइयों जैसा प्रेम दिया, तो वहीं जेठानी विमला जैन, स्नेहलता जैन और मिथलेश जैन ने उन्हें हमेशा छोटी बहन का स्थान दिया।

एक रसोई और हर दिन एक त्योहार

विवाह के बाद ससुराल में सभी सदस्यों के साथ एक ही छत के नीचे रहने का अनुभव बेहद अनोखा रहा है। पुश्तैनी मकान की एक ही रसोई में पूरे परिवार के लिए भोजन तैयार होता है। घर का हर उत्सव, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, किसी बड़े त्योहार की तरह मनाया जाता है। परिवार के सभी भाई अपने सेवाकाल से सेवानिवृत्त हो चुके हैं,जैसे बड़े जेठ सगुन चंद प्राइवेट फैक्ट्री से, प्रमोद जैन शिक्षक पद से और प्रभात जैन मोतीमहल कार्यालय से सेवानिवृत्त हुए हैं।

भाइयों के बीच अटूट स्नेह और आपसी समझ का ही नतीजा है कि वे आज भी अलग होने के बजाय एक साथ ही खुशी-खुशी जीवन बिता रहे हैं।

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पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता आत्मीयता का दायरा

इस बड़े परिवार में बच्चों की उपस्थिति से घर हमेशा गुलजार रहा है। बड़े जेठ-जेठानी के दो बेटे और एक बेटी हैं, दूसरे नंबर के जेठ-जेठानी के दो बेटियां और एक बेटा है, और तीसरे नंबर के जेठ-जेठानी के भी दो बेटियां और एक बेटा हैं। वीना जी और विनोद जी के तीन बेटे-लवीराज, सौरभ और गौरव हैं।

सौरभ के विवाह के बाद परिवार में वधू खुशबू के आने से खुशियां और बढ़ गई हैं। खास बात यह है कि परिवार के सभी भतीजे-भतीजी वीना को अपनी छोटी मां की तरह अगाध सम्मान देते हैं। जिस तरह पांचों भाइयों में अटूट प्रेम है, ठीक उसी तरह सभी जेठानियां भी आपस में सगी बहनों की तरह स्नेह से रहती हैं।

बेटी की कमी को प्रेम से किया पूरा

परिवार में अपनी बेटी न होने की कसक को वीना ने एक खूबसूरत मिसाल पेश कर दूर किया। उन्होंने अपनी बहन की बेटी रश्मि को अपनी ही बेटी मानकर उसका पालन-पोषण किया और बड़े ही प्रेम से उसका विवाह किया। आज 41 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस भरे-पूरे परिवार का एक साथ रहना एक अनूठा अहसास कराता है।

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