
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: जाली दस्तावेजों के जरिये पासपोर्ट बनवाने और घुसपैठ कराने के बहुचर्चित मामले में गिरफ्तार किए गए भंते गुलाब राय गौतम से पूछताछ का दौर आखिरकार पूरा हो गया है। एसटीएफ की तीन अलग-अलग टीमों ने भंते से लगातार 96 घंटे तक पूछताछ की।
इस दौरान उसे मामले के अन्य आरोपियों रियाल चौधरी, नसीम अख्तर और प्रियान चौधरी के सामने बैठाकर कई राज उगलवाए गए। 96 घंटे की गहन पूछताछ के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार इस पूरे रैकेट का सरगना रियाल चौधरी है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि रियाल ही बांग्लादेशियों को भारत में अवैध रूप से दाखिल कराने के बाद उन्हें नया रंग-रूप और पहचान देता था। वह बौद्ध मठ में यह यकीन दिलाता था कि इन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया है, इसलिए ये सभी "बौधिस्त" (बौद्ध) हैं। आरोपियों के नए नाम भी रियाल चौधरी ही तय करता था।
जांच में यह भी चौंकाने वाला सच सामने आया है कि कुछ बांग्लादेशी घुसपैठियों ने सीमा पार करने के बाद अपना धर्म बदला ही नहीं था। इसके बावजूद वे रियाल चौधरी की मिलीभगत और साठगांठ से स्थानीय बौद्ध मठ में शरण लेते थे। मठ में रहते हुए वे चीवर (भिक्षुओं द्वारा पहने जाने वाले पीले/भगवा वस्त्र) पहनकर अधिकारियों और आम लोगों को गुमराह करते थे, जिससे किसी को उन पर शक न हो।
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मठ में पनाह मिलने के बाद ये लोग जाली और जाली दस्तावेज (आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) तैयार करवाते थे, जिसके आधार पर इनके फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों और दस्तावेजों को सत्यापित करने की दिशा में आगे की कार्रवाई कर रही है। एसटीएफ ने भंते गुलाब राय, प्रियान चौधरी और नसीम अख्तर को कोर्ट में पेश किया। यहां से इन्हें जेल भेज दिया गया।
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