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नईदुनिया न्यूज, मुरैना। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने मुरैना के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सक्सेना के निलंबन मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है।
न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहारावत की पीठ ने 27 अक्टूबर को पारित आदेश में 14 अक्टूबर के निलंबन आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
न्यायालय के इस आदेश से याचिकाकर्ता को बड़ी कानूनी राहत मिली है। प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनीत सक्सेना ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को न्यायालय में उचित जानकारी प्रस्तुत नहीं करने के आरोप में निलंबित किया गया, जबकि पूर्व याचिका की कार्रवाई में उन्हें व्यक्तिगत रूप से इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि पूर्व प्रकरण में राज्य शासन के जवाब में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रासंगिक प्रावधानों का समुचित उल्लेख नहीं था।
इसी कारण खंडपीठ ने राज्य शासन को संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विशिष्ट जवाब प्रस्तुत करने तथा भविष्य में शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
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अधिवक्ता का तर्क था कि इस कार्रवाई को तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी की व्यक्तिगत गलती मानकर उन्हें निलंबित करना अनुचित है। न्यायालय ने अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दिया।
आदेश के अनुसार, 14 अक्टूबर के निलंबन आदेश का प्रभाव एवं क्रियान्वयन अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा। इससे पहले हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया के निलंबन पर भी स्टे जारी किया था।
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