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Gwalior: ऐतिहासिक नैरोगेज विरासत खत्म होने की कगार पर, पटरियां उखाड़ने का काम शुरू, एक सदी तक रही लाइफलाइन

ग्वालियर में नैरोगेज ट्रेन की शुरूआत वर्ष 1905 में हुई थी। इसे चलाने के लिए वर्ष 1894 से ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया गया था। शुरुआत में ग्वालियर से ...और पढ़ें

By Priyank SharmaEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 04:41:13 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 05:09:36 PM (IST)
Gwalior: ऐतिहासिक नैरोगेज विरासत खत्म होने की कगार पर, पटरियां उखाड़ने का काम शुरू, एक सदी तक रही लाइफलाइन
खत्म होने की कगार पर पहुंच रही नैरोगेज विरासत (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. नैरोगेज को हेरिटेज ट्रेन रूप में संचालित की संभावनाएं खत्म
  2. एक सदी से अधिक समय तक रही अंचल की लाइफलाइन
  3. खत्म होने की कगार पर पहुंच रही ऐतिहासिक विरासत

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में नैरोगेज ट्रेन को हेरिटेज ट्रेन के रूप में संचालित करने की सभी संभावनाएं अब खत्म हो गई हैं। एक सदी से अधिक समय तक अंचल की लाइफलाइन बनी यह ट्रेन कोरोनाकाल में बंद कर दी गई थी। बाद में इसे हेरिटेज ट्रेन के रूप में चलाने की संभावनाएं भी तलाशी गईं, लेकिन कोई ठोस प्लान तैयार नहीं हो सका।

यही कारण है कि अब यह ऐतिहासिक विरासत खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है। रेलवे के अमले ने भी नैरोगेज ट्रैक के आसपास की भूमि का वैकल्पिक उपयोग करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते अब नैरोगेज ट्रेन की पटरियां उखाड़ने का काम शुरू कराया गया है।


हालांकि, हेरिटेज ट्रेन की बात करें, तो इंदौर के महू में अब भी नैरोगेज को हेरिटेज ट्रेन के रूप में पातालपानी से कालाकुंड के बीच संचालित किया जा रहा है, लेकिन इस ऐतिहासिक विरासत को ग्वालियर में नहीं बचाया जा सका। कोरोनाकाल के दौरान इस ऐतिहासिक ट्रेन का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।

इसके बाद से ही विभिन्न स्तरों पर इसे हेरिटेज के रूप में सहेजने की मांग लगातार उठाई जा रही थी, ताकि शहर की इस पुरानी विरासत को बचाया जा सके।

अब ट्रैक की पटरियों को हटाए जाने के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर का स्वरूप भी तेजी से खत्म होने लगा है। वर्तमान में रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक चार की तरफ मौजूद नैरोगेज की पटरियां उखड़ चुकी हैं।

इसके अलावा लक्ष्मणपुरा क्रासिंग पर भी इन पटरियों को हटाकर वहां फूड जोन तैयार किया जा रहा है। ऐसे में साफ है कि पटरियां न होने की स्थिति में ट्रेन का संचालन संभव ही नहीं हो सकेगा और अघोषित रूप से यह तय भी हो चुका है कि अब शहर में हेरिटेज ट्रेन का संचालन सिर्फ सपना बनकर रह जाएगा।

स्टेट टाइम में शुरू हुई थी सेवा, नैरोगेज कोच भी हो चुके गायब

ग्वालियर में नैरोगेज ट्रेन की शुरूआत वर्ष 1905 में हुई थी। इसे चलाने के लिए वर्ष 1894 से ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया गया था। शुरुआत में ग्वालियर से अंचल के श्योपुर, शिवपुरी और भिंड तक नैरोगेज ट्रेन का संचालन किया जाता था। इसके साथ ही ग्वालियर शहर के अंदर भी ट्रेन चलती थी। जयविलास पैलेस से लेकर मुरार तक इसकी पटरियां बिछी हुई थीं।

हालांकि, बाद में सिर्फ श्योपुर तक 197 किमी लंबाई में नैरोगेज ट्रैक पर ट्रेन संचालित होती थी। यहां बड़ी संख्या में इसके कोच भी मौजूद थे, जो धीरे-धीरे कर देश के विभिन्न स्टेशनों पर प्रदर्शित करने के लिए भेज दिए गए। कुछ कोच को कंडम घोषित कर बेच भी दिया गया।

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मोतीझील तक संचालित करने की थी मांग

इस ट्रेन को ग्वालियर रेलवे स्टेशन से मोतीझील स्टेशन तक हेरिटेज के रूप में संचालित करने की मांग भाजपा नेता सुधीर गुप्ता ने कई बार की थी। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी सिटी हेरिटेज के रूप में ट्रेन को संचालित करने का सुझाव दिया था।

इसके बाद रेलवे बोर्ड से भी टीम ने आकर यहां संभावनाएं तलाशी थीं, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद अब रेलवे स्टेशन के समीप पटरियों को हटाने का सिलसिला शुरू हो गया है। ट्रैक के उखड़ने के साथ ही अब हेरिटेज ट्रेन के संचालन का सपना खत्म होने के कगार पर है।

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