
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सरकारी या आबादी की जमीन पर काबिज संपत्तिधारकों (गैर पंजीकृत संपत्तियों) से भी अब नगर निगम द्वारा संपत्तिकर की वसूली की जाएगी। इसके लिए उनकी विशेष आइडी बनाने का काम किया जाएगा। लंबे समय से काबिज संपत्तिधारकों की आइडी बनाकर उनसे टैक्स वसूलने की मांग की जा रही थी।
जुलाई 2016 में तत्कालीन मेयर इन काउंसिल ने भी इसका एक संकल्प किया था, जबकि वर्तमान परिषद ने इसे लेकर तीन बार ठहराव पारित किए थे। पिछले दिनों बैठक में सभापति मनोज सिंह तोमर ने भी इस संबंध में निगमायुक्त संघ प्रिय को दिए थे, जिसके बाद निगमायुक्त ने आदेश जारी कर आइडी बनाने और संपत्तिकर वसूलने के निर्देश दिए हैं यानी संकल्प का पालन अब 10 साल बाद शुरू होगा।
दरअसल, निगम एक्ट में भूमि या भवन के किसी अधिभोगी यानी काबिज से भी संपत्तिकर वसूलने का प्रविधान है। निगम सीमा में पहले से ही कई संपत्तिधारक घोषित आबादी क्षेत्र की भूमि, निजी भूमि तथा अन्य जमीन पर काबिज होकर कई वर्षों से निवास कर रहे हैं। वे निगम द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएं जैसे पेयजल, सीवर, सड़क, स्ट्रीट लाइट आदि का उपयोग करते हैं।
इनमें से कुछ की संपत्तिकर आइडी बनाई भी गई थीं, लेकिन एक बड़ी आबादी से टैक्स वसूल नहीं किया जाता है। इसके पीछे अधिकारी यह तर्क देते थे कि संपत्तिकर की रसीद के आधार पर काबिज संपत्तिधारक कोर्ट केस कर मालिकाना हक की मांग करता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने भी अपने आदेशों में यह कहा है कि निगम की संपत्तिकर आइडी या नामांतरण को स्वत्व-स्वामित्व के प्रमाण के रूप में मान्य नहीं किया जाता।
इसके बावजूद वसूली नहीं होने से निगम को भी नुकसान हो रहा था। पिछली बैठक में सभापति ने जब निगमायुक्त को निर्देश दिए, तो अब आदेश जारी कर दिया गया है।