ग्वालियर में एरोपोनिक्स पद्धति से उगेगा बैंगनी रंग वाला कुफरी जमुनिया आलू, सेहत से लेकर उत्पादन तक साबित होगा खरा सोना
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय पहली बार आधुनिक एरोपोनिक्स तकनीक से कुफरी जमुनिया आलू पर शोध शुरू करने जा रहा है।
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 11:26:22 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 11:32:43 AM (IST)
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में शुरू होगा शोध, नईदुनियाHighLights
- एरोपोनिक्स पद्धति से उगेगा कुफरी जमुनिया आलू
- सेहत और उत्पादन के लिए बेहद लाभदायक
- विश्वविद्यालय ने मंगाए शिमला से कुफरी जमुनिया बीज
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जामुन जैसे गहरे बैंगनी रंग वाला आलू अब कृषि विज्ञानियों के शोध का विषय बनेगा। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय पहली बार आधुनिक एरोपोनिक्स तकनीक से कुफरी जमुनिया आलू पर शोध शुरू करने जा रहा है।
यह शोध केवल आलू के उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पौधों की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और किसानों के लिए इसकी व्यावसायिक उपयोगिता का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय ने केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला से कुफरी जमुनिया के बीज मंगाए हैं।
टिश्यू कल्चर तकनीक से पौधे तैयार करने के बाद उन्हें नियंत्रित वातावरण वाले नेट हाउस में विकसित किया जाएगा। कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉक्टर आरए कौशिक ने बताया कि कुफरी जमुनिया सामान्य आलू से बिल्कुल अलग विशेषताओं वाली प्रजाति है।
इसका गूदा गहरे बैंगनी रंग का होता है, जो इसे आकर्षक बनाने के साथ पोषण की दृष्टि से भी खास बनाता है। यह किस्म करीब 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी उत्पादन क्षमता 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर तक है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी खास
कुफरी जमुनिया में एंटी आक्सीडेंट, विटामिन सी, एंथोसायनिन, कैरोटीनायड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक हैं। सामान्य आलू से बेहतर स्वाद के अलावा इसका उपयोग सब्जी, सलाद और विभिन्न व्यंजनों में किया जा सकता है।
कृषि विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नई और पोषणयुक्त फसलों पर शोध को प्राथमिकता दी जा रही है। कुफरी जमुनिया आलू पर एरोपोनिक्स तकनीक से किया जाने वाला शोध महत्वपूर्ण है।
इससे गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने के साथ क्षेत्र की जलवायु में इसकी खेती की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। डॉक्टर अरविंद कुमार शुक्ला, कुलगुरु, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय
शोध से खुलेगा किसानों के लिए नया विकल्प
कृषि विज्ञानी एरोपोनिक्स तकनीक से तैयार पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। साथ ही यह देखा जाएगा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की जलवायु में कुफरी जमुनिया की खेती कितनी सफल और लाभकारी हो सकती है।
शोध के सकारात्मक परिणाम आने पर किसानों को पारंपरिक आलू की खेती के साथ एक नई, आकर्षक और संभावित रूप से अधिक मूल्य वाली फसल का विकल्प मिल सकता है।