
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल का प्रतिष्ठित जीआरएमसी और जेएएच समूह अब आरोप-शिकायतों और विवादों का अखाड़ा बन गया है। हैरानी की बात यह है कि आरोप और शिकायतों का सिलसिला जिम्मेदारों पर ही चल रहा है।
यही कारण है कि जीआरएमसी विवादों के कारण सुर्खियों में है। हाल में डीन सहित तीन पर महिला कर्मचारी के आरोपों के बाद नया विवाद खड़ा हो गया, इसकी जांच हो पाती कि अब जिन पर आरोप है उनकी ओर से षडयंत्र और नए आरोप लगाए जा रहे हैं।
महिला कर्मचारी ने डीन, प्रभारी अधीक्षक और बाबू पर आरोप लगाए जिसमें अब बाबू का खुलेआम कहना है कि यह पूरा षडयंत्र सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉक्टर गिरजा शंकर गुप्ता का है। वहीं डॉक्टर नीलिमा टंडन ने भी शिकायत पर ही सवाल खड़े किए हैं।
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पूर्व में दर्ज हो चुकी है FIR
वहीं, पूर्व में डॉक्टर गुप्ता पर एक महिला एफआईआर दर्ज करा चुकी है। सबसे खास बात एक यह कि जीआरएमसी डीन डॉक्टर आरकेएस धाकड़ अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। महिला द्वारा डीन डॉक्टर आरकेएस धाकड़, प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर नीलिमा टंडन और अस्पताल में पदस्थ बाबू कामता प्रसाद मरैया के खिलाफ कंपू थाने और पुलिस अधीक्षक को शिकायती आवेदन देने के बाद से गर्माया हुआ है।
मामला इसलिए गंभीर है कि उसने आवेदन में प्रताड़ित करने, नौकरी से हटाने की धमकी देने, वेतन रोकने और कथित तौर पर अनुचित मांगों के लिए दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच कर रही है।
इस मामले में बाबू कामता प्रसाद मरैया ने महिला के आरोपों को गलत बताया और तत्कालीन अधीक्षक की भूमिका पर संदेह जताया है। प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर नीलिमा टंडन ने शिकायत के कारण से खुद को अनभिज्ञ बताया है।
शिकायत के बाद बढ़ी कलह
शिकायत के बाद बढ़ी अंदरूनी मतभेद की चर्चा मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से सामने आए बयानों के बाद जीआरएमसी से जुड़े अस्पतालों में प्रशासनिक स्तर पर चल रहे मतभेदों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, वर्तमान शिकायत का किसी आंतरिक विवाद, प्रतिस्पर्धा या अन्य कारण से संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
2025 में भी सामने आया था विवाद
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इससे पहले वर्ष 2025 में भी एक महिला कर्मचारी की शिकायत का मामला सामने आया था। महिला की शिकायत के बाद तत्कालीन अधीक्षक डॉक्टर गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। उस मामले में भी संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए थे।