
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को पट्टे पर मिली जमीनों से बेदखल करने और उन पर प्रभावशाली लोगों के कब्जे के मामले में हाई कोर्ट ने श्योपुर कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने कहा कि सरकार गरीब वर्ग को ताकतवर लोगों के चंगुल से मुक्त कराने का प्रयास कर रही है, लेकिन श्योपुर कलेक्टर अपने वातानुकूलित कक्ष से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत जानने को तैयार नहीं हैं।
वे कार्यालय में उपलब्ध अधूरे दस्तावेजों के आधार पर ही निर्भर हैं। कोर्ट ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को उच्चस्तरीय समिति गठित कर पूरे मामले की स्वतंत्र रूप से मैदानी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने छोटेलाल आदिवासी की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि श्योपुर जिले में पहले 440 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई थी, जबकि वास्तविक संख्या 449 होनी चाहिए थी।
इनमें 14 मामलों में पट्टा निरस्त किया गया था। कोर्ट की आपत्ति के बाद यह जवाब वापस लेकर नया जवाब पेश किया गया, जिसमें कुल 697 मामले दर्ज होना बताया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि पहले आंकड़े कार्यालय में उपलब्ध जानकारी के आधार पर दिए गए थे।
बाद में समिति गठित कर मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें 697 मामले सामने आए। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले भी तत्कालीन कलेक्टर संजय कुमार लगभग 600 मामलों की जानकारी दे चुके थे और दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका जताई थी। इसके बावजूद वर्तमान कलेक्टर ने अधूरी जानकारी के आधार पर रिपोर्ट पेश की। अब यह भी स्पष्ट नहीं है कि 697 मामलों का आंकड़ा अंतिम है या अभी अस्थायी है।
प्रमुख सचिव गठित करेंगे उच्च स्तरीय समिति
कोर्ट ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को उच्चस्तरीय समिति गठित कर स्वतंत्र मैदानी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। समिति यह पता लगाएगी कि कितने लोगों का प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शोषण किया जा रहा है और गरीबों को उनके अधिकार दिलाने के लिए सरकारी एजेंसियों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
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कोर्ट ने प्रमुख सचिव को तत्कालीन कलेक्टर संजय कुमार की छवि खराब करने के मामले में भी वर्तमान कलेक्टर से स्पष्टीकरण मांगने की छूट दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे से श्योपुर जिले के सभी जवाब कलेक्टर के शपथपत्र के साथ ही पेश किए जाएंगे। किसी अन्य अधिकारी को प्रकरण का प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) नियुक्त नहीं किया जाएगा।
गुना में 184 मामलों में जमीन वापसी के आदेश, एफआईआर सिर्फ 24
सुनवाई के दौरान गुना जिले की स्थिति भी सामने आई। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि वहां कुल 197 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 189 मामलों में जमीन वापस करने के आदेश पारित किए गए हैं, जबकि आठ मामले लंबित हैं। हालांकि 184 मामलों में जमीन वापसी के आदेश होने के बावजूद केवल 24 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग लोगों के साथ अलग-अलग अपराध हुए हैं तो एक ही एफआइआर में कई पीड़ितों और आरोपितों को शामिल करने का आधार क्या है।
कोर्ट ने सरकार से एक सप्ताह में विस्तृत चार्ट पेश करने को कहा है, जिसमें प्रत्येक मामले में प्रभावित पट्टाधारी और जमीन से बेदखल करने वाले लोगों का ब्योरा हो। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।