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अपील में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, CMHO को तीन लाख रुपये अपनी जेब से जमा करने का आदेश

एक मामले में 329 दिन की देरी से अपील पेश करने पर हाई कोर्ट ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) एमएस सागर को जिम्मेदार माना है।

By Vikram Singh TomarEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 10:06:54 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 10:06:54 PM (IST)
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अपील में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, CMHO को तीन लाख रुपये अपनी जेब से जमा करने का आदेश
ग्वालियर हाई कोर्ट, फाइल फोटो

HighLights

  1. 329 दिन में दायर की गई अपील..
  2. देरी होने पर ग्वालियर HC सख्त
  3. CMHO पर तीन लाख का जुर्माना

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सरकारी मामलों में अपील दायर करने में लगातार हो रही देरी और अधिकारियों की लापरवाही पर हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की युगलपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है।

एक मामले में 329 दिन की देरी से अपील पेश करने और देरी माफी के लिए अस्पष्ट आवेदन लगाने पर कोर्ट ने ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) एमएस सागर को जिम्मेदार माना है।

कोर्ट ने उन्हें अपनी जेब से तीन लाख रुपये रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को सीएमएचओ के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने और एक महीने में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य शासन की ओर से दायर रिट अपील की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। मामला देवेंद्र सिंह परमार (मृत) के विधिक उत्तराधिकारियों से जुड़ा है। शासन की ओर से अपील दायर करने में 329 दिन की देरी हुई थी।


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राज्य की ओर से देरी माफ करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया, लेकिन कोर्ट को उसमें दिए गए कारण पर्याप्त नहीं लगे। सुनवाई के दौरान सीएमएचओ डॉ. एमएस सागर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है।

इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने आवेदन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि प्रकरण के प्रभारी अधिकारी (ओआइसी) के तौर पर प्रस्तुत किया है।

इसलिए उनकी जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। सीएमएचओ ने पूर्व अधिकारियों की सुस्ती को देरी का कारण बताया, लेकिन यह नहीं बता सके कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था

युगलपीठ ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश शासन को अपीलों में देरी रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर समय सीमा का पालन नहीं हो रहा है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को सीएमएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा है।

ओआईसी को एक सप्ताह के भीतर तीन लाख रुपये जमा करने होंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

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