ग्वालियर में 40 फीसदी तक पहुंचा ओरल कैंसर का आंकड़ा, पूरी दुनिया के मुकाबले दोगुना, बीते तीन साल में हुई इससे 35 मौतें
पूरी दुनिया में ओरल (मुंह) कैंसर का औसत 16 से 20 प्रतिशत है, वहीं ग्वालियर-चंबल में यह आंकड़ा 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 03:56:06 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 03:56:06 PM (IST)
ग्वालियर में तेजी से फैल रहा ओरल कैंसर, फाइल फोटोHighLights
- ग्वालियर में तेजी से फैल रहा ओरल कैंसर
- पूरी दुनिया में कैंसर का औसत 20 फीसदी
- युवा अवस्था में बना रहा सबसे ज्यादा शिकार
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। पूरी दुनिया में ओरल (मुंह) कैंसर का औसत 16 से 20 प्रतिशत है, वहीं ग्वालियर-चंबल में यह आंकड़ा 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जयारोग्य चिकित्सालय के कैंसर रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले हर 100 मरीजों में से लगभग 40 लोग ओरल कैंसर से जूझ रहे हैं।
अब तक हो चुकी 35 मौतें
ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) सबसे ज्यादा 35 से 54 साल की उम्र के लोगों में हैं। इतना ही नहीं ओरल कैंसर से पिछले तीन साल में 35 मरीजों की मौत हो चुकी है। ओरल कैंसर का बड़ा कारण पान मसाला है और इसी पान मसाले की गुणवत्ता से लेकर अन्य मायनों में निगरानी करने वाली एजेंसियां सुस्त बैठी हुई हैं।
निर्माण, परिवहन और खपत किसी प्लेटफार्म पर सर्विलांस नहीं है जिससे कम से कम घटिया स्तर के पान मसाला पर तो अंकुश लगाया जा सके। बता दें कि, ग्वालियर चंबल अंचल में बनने वाले पान मसाला को लेकर क्या प्रोटोकॉल अपनाए जा रहे हैं, पैकिंग पर जो लिखकर दिया जा रहा है वह सभी मापदंड पालन में हैं भी या नहीं यह कोई देखता ही नहीं है।
छोटी यूनिटों के रूप में काम शुरू कर लिया जाता है और फिर मुनाफे के चक्कर में यह नहीं देखा जाता कि वे नियम तक नहीं मान रहे। इसकी रूटीन मॉनीटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार,ओरल कैंसर के कारणों में बदली लाइफस्टाइल और तंबाकू, बीड़ी व गुटखे का बेतहाशा सेवन है।
ग्वालियर चंबल अंचल में बढ़ रहा ओरल कैंसर का आंकड़ा
पान मसाला के तंत्र को पता करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि इनकी रोजाना सैंपलिंग की जाए और निगरानी भी समय समय पर होती रही। सैंपल होंगे तो पता चलेगा कि पान मसाला कारोबार किस तरह किया जा रहा है, गुणवत्ता को लेकर कितना ध्यान रखा जा रहा है। इसको लेकर जांच पड़ताल का विशेष अभियान भी चलाने की जरूरत है।
मुंह के कैंसर के मामलों में तंबाकू, बीड़ी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। कम उम्र में इनका नियमित सेवन शुरू करने से खतरा और बढ़ जाता है। मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, सफेद या लाल चकत्ता, गांठ, लगातार दर्द, मुंह खोलने में परेशानी या निगलने में दिक्कत जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध रहते हैं। डॉक्टर-अक्षय निगम, विभागाध्यक्ष कैंसर विभाग, जेएएच।