ग्वालियर में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल, सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं; एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच बंद
लोको स्थित बीमा अस्पताल में इलाज की व्यवस्था सुधारने की कवायद तेज हुई है, लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से अस्पताल की डायग्नोस्टिक सेवाएं अब भी अधूरी ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 08:37:48 AM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 08:37:48 AM (IST)
जांच के लिए कतार में लगे मरीज, नईदुनियाHighLights
- ग्वालियर शहर में स्वास्थ्य सेवाएं हुई बेहाल
- बीमा अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं
- एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच बंद
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। लोको स्थित बीमा अस्पताल में इलाज की व्यवस्था सुधारने की कवायद तेज हुई है, लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से अस्पताल की डायग्नोस्टिक सेवाएं अब भी अधूरी हैं। यहां चेस्ट, हड्डी और अन्य बीमारियों से संबंधित एक्स-रे की रिपोर्ट जारी करने के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा सोनोग्राफी की सुविधा के लिए भी मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। नतीजतन, बीमित श्रमिकों को सामान्य जांच के लिए भी सिविल अस्पताल हजीरा या जयाआरोग्य अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।
बीमा अस्पताल में उपचार के दौरान डॉक्टर यदि एक्स-रे या सोनोग्राफी की सलाह देते हैं तो जांच कराने के बाद रिपोर्ट तैयार कराने की समस्या सामने आती है।
कतारों में लगे रहते हैं मरीज
रेडियोलाजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को हजीरा सिविल अस्पताल या जेएएच रेफर किया जा रहा है। इन अस्पतालों में पहले से ही मरीजों का दबाव और जांचों की वेटिंग रहती है। ऐसे में बीमा अस्पताल से भेजे गए मरीजों को घंटों कतार में लगकर जांच करानी पड़ती है।
रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें दोबारा लोको स्थित बीमा अस्पताल पहुंचना पड़ता है। इससे मरीज का उपचार भी प्रभावित होता है और उसका समय भी अतिरिक्त खर्च होता है।
विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज
मई 2026 में राज्य सरकार से केंद्र सरकार को पूर्ण रूप से हैंडओवर होने के बाद लोको स्थित बीमा अस्पताल के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज हुई है। अस्पताल में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं। मेडिकल ऑफिसरों की भर्ती के लिए भी इंटरव्यू प्रक्रिया चल रही है। इससे अस्पताल में उपचार की सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद है।
कब सुधरेगी जांच व्यवस्था
विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति और मेडिकल स्टाफ की भर्ती से अस्पताल में उपचार व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति के बिना एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसी जरूरी सेवाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही हैं।
ऐसे में बीमित श्रमिकों को बेहतर उपचार के लिए अस्पताल मिलने के बजाय सामान्य जांच के लिए भी दूसरे सरकारी अस्पतालों की लंबी कतार में लगना पड़ रहा है।
हजीरा और जेएएच में जांच कराने को मजबूर बीमित श्रमिक
रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति बनी सबसे बड़ी चुनौती अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद रेडियोलाजिस्ट की कमी डायग्नोस्टिक व्यवस्था में सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, रेडियोलाजिस्ट के पद पर या तो पर्याप्त आवेदन नहीं आए या चयनित अभ्यर्थी ने ज्वाइन नहीं किया।
इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल में एक्स-रे जैसी प्राथमिक जांच उपलब्ध होने के बावजूद उसकी विशेषज्ञ रिपोर्ट के लिए मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ रहा है।