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ग्वालियर में मौसम बदलते ही कम हुआ लंपी वायरस का प्रकोप, अब तक 60 हजार मवेशियों का टीकाकरण

मानसून की विदाई और वर्षा थमने के साथ ही शहर में लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से कम होने लगा है।

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 11:55:07 AM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 12:55:07 PM (IST)
ग्वालियर में मौसम बदलते ही कम हुआ लंपी वायरस का प्रकोप, अब तक 60 हजार मवेशियों का टीकाकरण
रतवाई गोशाला में अब 20 गोवंश का चल रहा इलाज, फाइल फोटो

HighLights

  1. मौसम बदलाव के साथ कम हुआ लंपी वायरस का प्रकोप
  2. अब तक 60 हजार गोवंश का किया गया टीकाकरण
  3. रतवाई गोशाला में अब 20 गोवंश का चल रहा इलाज

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिले में मौसम के बदलते ही लंपी स्किन डिजीज से पीड़ित गोवंश और पशुपालकों को बड़ी राहत मिली है। मानसून की विदाई और वर्षा थमने के साथ ही शहर में लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से कम होने लगा है।

नगर निगम के मदाखलत और पशु चिकित्सा अमले द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से संक्रमण की चपेट में आए गोवंश को रतवाई स्थित गोशाला पहुंचाया जा रहा है। राहत की बात यह है कि जहां पहले रोजाना पांच से 10 लंपी संक्रमित गोवंश गोशाला पहुंचाए जा रहे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर रोजाना केवल एक से दो पर आ गई है।


मौसम में बदलाव और रुका संक्रमण

पशु चिकित्सकों के अनुसार, लंपी वायरस का प्रसार मुख्य रूप से बरसात के मौसम में मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे कीटों के माध्यम से तेजी से होता है। मानसून के दौरान वातावरण में नमी अधिक होने के कारण यह कीट अत्यधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे एक संक्रमित गोवंश से दूसरे स्वस्थ गोवंश में वायरस आसानी से फैल जाता है।

वर्षा थमने और धूप खिलने के साथ ही कीटों का असर कम हुआ है, जिससे लंपी वायरस का संक्रमण चक्र टूट रहा है।

अब तक 60 हजार गोवंश का हुआ टीकाकरण

लंपी वायरस की रोकथाम के लिए जिले भर में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया। विभाग की टीमों द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर अब तक लगभग 60 हजार से अधिक गोवंश का गोट पाक्स वैक्सीन से निःशुल्क टीकाकरण किया जा चुका है।

हालांकि, बीमारी की चपेट में आने से गोवंश की मृत्यु दर को लेकर विभाग और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर देखने को मिल रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक लगभग 65 गोवंश की मौत दर्ज की गई है, जबकि स्थानीय पशुपालकों और गोसेवकों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक है।

शहर के विभिन्न हिस्सों में मरने वाले गोवंश की संख्या ही दर्ज नहीं की गई है। ऐसे में लंपी से मरने वाले गोवंश की संख्या कहीं अधिक रहा है।

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गोशाला में 20 गोवंश का चल रहा इलाज

रतवाई गोशाला में बनाए गए विशेष आइसोलेशन वार्ड में अभी भी लगभग 20 संक्रमित गोवंश का डॉक्टरों की निगरानी में उपचार चल रहा है। इन गोवंश को स्वस्थ गोवंश से बिल्कुल अलग रखा गया है और उन्हें एंटीबायोटिक्स, मल्टीविटामिन दी जा रही हैं।

पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को सलाह दी है कि भले ही वायरस का प्रकोप कम हो गया हो, लेकिन फिर भी सावधानी बरतनी बेहद जरूरी है। यदि किसी गोवंश में शरीर पर गांठें बनने, बुखार आने या सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत अन्य मवेशियों से अलग करें और नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र में संपर्क कर उपचार कराएं।

मौसम में बदलाव के साथ जिले में लंपी वायरस का प्रकोप कम हुआ है। अब रतवाई गोशाला में निगम से संक्रमित गोवंश को ले जाने की संख्या काफी कम हो गई है। महज एक या दो गोवंश ही गोशाला पहुंच रहे हैं। गोशाला में संक्रमित पशुओं का इलाज किया जा रहा है। अभी तक 60 हजार से अधिक गोवंश का वैक्सीनेशन कर दिया गया है। डॉक्टर दिलीप गुप्ता, उप संचालक, पशुपालन

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