
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) परीक्षा भले ही अभी कुछ महीने दूर हो, लेकिन सीबीएसई स्कूलों में इसकी तैयारी का सिलसिला शुरू हो गया है। कक्षा 10वीं और 12वीं की 2026-27 मुख्य बोर्ड परीक्षा के लिए सीबीएसई ने स्कूलों से लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) जमा करने संबंधी निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए परीक्षा पैटर्न को समझने का एक अहम माध्यम सैंपल क्वेश्चन पेपर और मार्किंग स्कीम भी चर्चा में है।
सैंपल पेपर को केवल परीक्षा से पहले अभ्यास के लिए हल करने वाला पेपर समझना विद्यार्थियों की तैयारी को सीमित कर सकता है। इसमें प्रश्नों की प्रकृति, प्रश्नपत्र का डिजाइन और पाठ्यक्रम के विभिन्न हिस्सों को किस तरह पूछा जा सकता है, इसकी व्यापक समझ मिलती है।
सीबीएसई स्वयं सैंपल पेपर और मार्किंग स्कीम को प्रश्नपत्र के डिजाइन तथा पाठ्यक्रम की उचित कवरेज के लिए मार्गदर्शक बताता रहा है। विद्यार्थियों के लिए चार काम जरूरी सैंपल पेपर को निर्धारित समय में हल करें। हल करने के बाद मार्किंग स्कीम से अपने उत्तरों का मिलान करें। जिन प्रश्नों में बार-बार गलती हो रही है, उनकी अलग सूची बनाएं।
स्कूल में जमा होने वाले एलओसी में अपना नाम, विषय और अन्य विवरण सही हैं या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
सिर्फ प्रश्न हल करना पर्याप्त नहीं
सहोदय कॉम्पलेक्स के संरक्षक विनय झलानी के अनुसार, विद्यार्थी सैंपल पेपर हल करने के बाद मार्किंग स्कीम जरूर देखें। इससे पता चलता है कि किसी उत्तर में किन बिंदुओं को महत्व दिया गया है। खासकर लंबे उत्तर वाले विषयों में विद्यार्थी कई बार जानकारी तो पूरी लिख देते हैं, लेकिन प्रश्न के अनुसार उत्तर को व्यवस्थित नहीं कर पाते।
मार्किंग स्कीम देखकर वे यह समझ सकते हैं कि उत्तर में मुख्य बिंदु, अवधारणा, उदाहरण या आवश्यक चरण किस तरह प्रस्तुत किए जाने चाहिए। परीक्षा संगम पर सीबीएसई ने सैंपल क्वेश्चन पेपर, मार्किंग स्कीम, क्वेश्चन बैंक और मॉडल आंसर जैसी परीक्षा संबंधी सामग्री के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध कराई है।
एलओसी में छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ स्कूलों में विद्यार्थियों का परीक्षा संबंधी डेटा भी तैयार किया जा रहा है। सीबीएसई ने कक्षा 10वीं और 12वीं की मुख्य परीक्षाओं 2026-27 के लिए एलओसी जमा करने की प्रक्रिया संबंधी सर्कुलर 21 सितंबर को जारी किया था।
इस चरण में विद्यार्थियों के नाम, विषय और अन्य विवरणों की शुद्धता महत्वपूर्ण है। सीबीएसई के पिछले एलओसी निर्देशों में भी विषय संबंधी विवरण को सावधानी से भरने पर जोर दिया गया था, क्योंकि बाद में विषय परिवर्तन से जुड़ी मांगें स्वीकार नहीं की जातीं।