
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने गणित शिक्षा को लेकर एक अहम बदलाव किया है। कक्षा आठवीं के लिए जारी की गई नई पुस्तक ‘गणित प्रकाश (भाग-2)’ में गणित को डर और बोझ से निकालकर रोचक और उपयोगी विषय के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। ग्वालियर के स्कूलों में भी इस किताब को नए सत्र से पढ़ाया जाएगा।
अब छात्र केवल सैद्धांतिक फार्मूलों तक सीमित नहीं रहेंगे। किताब में रेस्टोरेंट के बिल में जीएसटी की गणना, लैपटॉप या किताब खरीदते समय टैक्स कैलकुलेशन जैसे उदाहरण शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही रसोई में मसालों के मिश्रण और उनके सही अनुपात के जरिए गणितीय अवधारणाओं को समझाने पर जोर दिया गया है।
छात्रों के बीच लंबे समय से यह सवाल रहा है कि पाइथागोरस थ्योरम का असल जिंदगी में क्या उपयोग है। नई किताब इस प्रश्न का सीधा जवाब देती है। अब इस प्रमेय को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर समझाया गया है, जिससे छात्रों की वैचारिक स्पष्टता और तार्किक सोच विकसित हो सके।
नई गणित पुस्तक में भारतीय गणितीय विरासत को भी प्रमुखता दी गई है। शिक्षाविदों के अनुसार, यह सराहनीय कदम है कि छात्रों को बताया जाएगा कि जिसे दुनिया पाइथागोरस थ्योरम के नाम से जानती है, वह दरअसल महान भारतीय गणितज्ञ बौधायन (800 ईसा पूर्व) द्वारा पहले ही प्रतिपादित किया गया था। अब इसे बौधायन-पाइथागोरस थ्योरम के नाम से पढ़ाया जाएगा।
किताब में एक्सेल शीट जैसे आधुनिक डिजिटल टूल्स के उपयोग की भी जानकारी दी गई है। इससे छात्रों को न केवल गणित बल्कि भविष्य के करियर के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल भी विकसित करने में मदद मिलेगी।
एनसीईआरटी ने कक्षा एक से आठवीं तक की नई किताबें जारी कर दी हैं। कक्षा आठवीं की सोशल साइंस का दूसरा भाग भी तैयार हो चुका है। निजी और सरकारी स्कूलों में सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले कक्षा नौवीं से 12वीं तक की सभी विषयों की नई किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, कक्षा 11वीं के छात्रों के लिए एक विशेष ब्रिज कोर्स भी तैयार किया जा रहा है।
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