
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य के पूर्व नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह की याचिका में संशोधन की अनुमति देते हुए मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने याचिका में इसके स्थान पर नई राहत जोड़ने की अनुमति दी थी।
अब मामले में राज्य सरकार को संबंधित तथ्यों और आंकड़ों के साथ जवाब प्रस्तुत करना है, लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एक माह का समय मांगा है। आठ सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की पीठ के समक्ष याचिका में संशोधन के आवेदन पर सुनवाई हुई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने बताया कि आवेदन में राहत संबंधी प्रार्थना को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता मूल राहत क्रमांक एक को हटाकर उसके स्थान पर आवेदन में उल्लिखित राहत क्रमांक 1-ए जोड़ना चाहता है। कोर्ट ने इस मौखिक अनुरोध को स्वीकार करते हुए संशोधन की अनुमति दे दी। इसके बाद संशोधित याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।
यह भी पढ़ें- ग्वालियर में पूर्व मंत्री गोविंद सिंह के भतीजे पर FIR, दफ्तर में घुसकर मारपीट का आरोप, CCTV में घटना कैद
नोटिस की तामील के लिए तीन कार्यदिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने को कहा गया था। मंगलवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सीपी सिंह ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।
कोर्ट ने उन्हें एक महीने का समय देते हुए मामले से संबंधित सभी प्रासंगिक आंकड़ों के साथ जवाब दाखिल करने को कहा, ताकि विवाद का प्रभावी निराकरण किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है। बता दें कि डॉ. गोविंद सिंह ने अपनी याचिका में मांग की है कि 45 साल पुराने डकैती अधिनियम को अब अप्रासंगिक और असंवैधानिक घोषित कर दिया जाए।
यह भी पढ़ें- MP में डकैत नहीं, फिर भी 1000 से ज्यादा FIR: 45 साल पुराने डकैती कानून की संवैधानिकता पर हाईकोर्ट का सरकार से सवाल