_m.webp)
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। शीतला माता मंदिर पर हुए भीषण हादसे के मामले में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार पर सवालिया निशान खड़े किए। जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार सामूहिक हत्याकांड की महारथी है, सरकार का ऐसा चेहरा कब तक रहेगा।
ग्वालियर कलेक्टर व एसपी इतने दिन पद पर कैसे बने हुए हैं। इसके अलावा पटवारी ने सरकार को घेरते हुए पुराने हादसों व मामलों पर भी सवाल उठाए। बुधवार को जीतू पटवारी ग्वालियर पहुंचे जहां कांग्रेस नेताओं के साथ हादसे में मृतक परिवारों के घर पहुंचकर ढ़ांढस बंधाया और घायलों का हालचाल जानने भी पहुंचे।
सामूहिक हत्याकांड की महारथी सरकार- पटवारी
पटवारी ने पत्रकारों से कहा कि हमारी जो सरकार है उसे सामूहिक हत्याकांड की महारथ हासिल है। 26 बच्चों की कफ सीरप में सामूहिक हत्या हुई फिर सागर में शराबकांड हुआ उससे पहले भिंड में शराब से लोग मरे। इंदौर में जहरीले पानी से लोग मरे।
इंदौर में ट्रक से हादसा हुआ उस समय तय हुआ था कि ऐसी घटना किसी जिले में होगी तो एसपी कलेक्टर पद पर नहीं रहेंगे। अब इतनी बड़ी घटना ग्वालियर में हुई है कुछ नहीं हुआ। इसको लेकर सरकार गंभीर नहीं है, मुख्यमंत्री जरुर आए,सिंधिया जी लोगों के साथ घूमते मिले। सरकार की गंभीरता क्या थी क्या एसपी को पद पर अभी रहना था, कलेक्टर का कोई दायित्व नहीं, सरकार राजनीतिक जिम्मेदारी कभी नहीं लेती।
लापरवाही प्रशासन की, जिम्मेदारी राजनीतिक दल की
जीतू पटवारी ने कहा कि कुछ समय पहले कोर कमेटी की बैठक हुई ,मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा सीरप कांड में दोषी कौन, यह लोग आपस में एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं। जनता को राहत कैसे मिलेगी। इस तरह की अराजकता रही सामूहिक हत्याकांड होते रहे तो यह चेहरा कब तक सरकार का ऐसा रहेगा।
यह गंभीर विषय है, परिवार को न्याय दिलाना है। लापरवाही प्रशासन की है जिम्मेदारी राजनीतिक दल की है सरकार की है। कलेक्टर और एसपी इतने दिन तक बने कैसे हैं। मुख्यमंत्री ने दो सीरप में सस्पेंड किए वे पद पर हैं, सागर में जो कार्रवाई की वे पद पर हैं।
इंदौर में जहरीले पानी से मौतें हुईं, उस छोटे अधिकारी को कलेक्टर बना दिया। सस्पेंड करना किसी को मूर्ख बनाना है, लाइन हाजिर करना जनता को गुमराह करना है, यानि कि हत्याओं का मजाक उड़ाना है।
यह भी पढ़ें- पटवारियों की हड़ताल से प्रदेश में बढ़ी लोगों की मुसीबतें, जमीन के सौदे से लेकर प्रमाणपत्र और किसानों के सर्वे अटके