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नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में अब चार नवंबर को सुनवाई होगी। गुरूवार को यह सुनवाई नियत थी लेकिन जिला कोर्ट में तिथि आगे बढ़ गई। अब यह पूरा मामला समझौते पर हस्ताक्षर की वैधता पर केंद्रित हो गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई चल रही है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा राणा के बयान दर्ज किए जाने हैं। प्रतिमा ने आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए थे।
अब उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी पेश करने होंगे। प्रतिमा राणा ने अदालत में आवेदन देकर समझौता प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराए।
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14 अक्टूबर को हुई थी सुनवाई
अदालत ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए पक्ष रखने का अवसर दिया है। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई में भी प्रतिमा के साक्ष्य दर्ज कराने के मुद्दे पर विचार किया गया था। प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राणा की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है।
उनका कहना है कि सहमति से हस्ताक्षर हुए, हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए। वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था।
लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें एक्स पार्टी (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।
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