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शीतला माता मंदिर हादसे में 12 साल की मन्नत से जन्मे जुड़वा बेटे भी ट्रक की चपेट में आए, चाचा के साथ गंवाई जान

ग्वालियर मंदिर हादसे में 12 साल की मन्नत से जन्मे जुड़वा भाइयों और चाचा की दर्दनाक मौत हो गई। मुरैना में तीनों की एक साथ अर्थियां उठने से भारी मातम है...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 03:53:35 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 03:53:35 PM (IST)
शीतला माता मंदिर हादसे में 12 साल की मन्नत से जन्मे जुड़वा बेटे भी ट्रक की चपेट में आए, चाचा के साथ गंवाई जान
जुड़वा बेटे ट्रक की चपेट में आए। (नईदुनिया)

HighLights

  1. ग्वालियर मंदिर हादसे में बच्चों सहित 15 की मौत हुई।
  2. 12 साल की मन्नत से जन्मे थे जुड़वा अमन-लव।
  3. बेकाबू ट्रक ने चाचा और दोनों भतीजों की जान ली।

डिजिटल डेस्क। ग्वालियर के आंतरी स्थित सांतऊ गांव का प्राचीन शीतला माता मंदिर उस खौफनाक रात के बाद अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है। भले ही श्रद्धालुओं के दिलों में हादसे का डर अभी भी ताजा है, लेकिन मां शीतला के प्रति उनका अटूट विश्वास डगमगाया नहीं है। यही वजह है कि अष्टमी और नवमी के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

हालांकि, भीड़ आम दिनों के मुकाबले थोड़ी कम है। गौरतलब है कि शनिवार-रविवार की दरमियानी रात एक बेलगाम और ओवरलोड ट्रक ने नो-एंट्री तोड़कर मंदिर परिसर में कहर बरपाया था, जिसमें बच्चों सहित 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 42 लोग घायल हो गए।


12 साल की मन्नतों से जन्मे थे अमन-लव

  • इस भीषण त्रासदी ने कई हंसते-खेलते परिवारों को जीवन भर का जख्म दे दिया है। सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली कहानी ग्वालियर के गदाईपुरा में रहने वाले त्यागी परिवार की है। मूल रूप से मुरैना के जौरा (हार गांगोली गांव) के रहने वाले 55 वर्षीय विद्याराम त्यागी ने 12 वर्षों तक मंदिरों की खाक छानी थी और कड़ी तपस्या की थी, तब जाकर उनके आंगन में जुड़वा बेटों अमन और लव का जन्म हुआ था।
  • शनिवार रात दोनों बच्चे अपने चाचा अशोक त्यागी के साथ मन्नत मांगने मंदिर गए थे, लेकिन काल बनकर आए ट्रक ने तीनों को कुचल दिया और परिवार का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।

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गांव में एक साथ उठीं तीन अर्थियां

रविवार की देर शाम जब मुरैना के पैतृक गांव में चाचा और दोनों मासूम भतीजों की अर्थियां एक साथ उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं और पूरे गांव में मातम पसर गया। इस हादसे का असर पूरे अंचल में दिखा है। थाटीपुर के गल्ला कोठार स्थित दो अलग-अलग श्मशान घाटों पर भी एक साथ कई अंतिम संस्कार किए गए। शिवपुरी, श्योपुर और बड़ागांव में भी गमगीन माहौल के बीच मृतकों को अंतिम विदाई दी गई।

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