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नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 6.62 गीगावाट तक पहुंच गई है। अब चुनौती इस बिजली को सुरक्षित तरीके से ग्रिड तक पहुंचाने और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की है। इसके लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) अगले पांच साल में बिजली नेटवर्क का विस्तार करेगी।
योजना के तहत 4867 किलोमीटर नई अति उच्च दाब बिजली लाइनें बिछाई जाएंगी। सौर ऊर्जा का उत्पादन धूप और मौसम के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है। ऐसे में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
श्रीलंका में हुए ब्लैकआउट ने भी मजबूत बिजली नेटवर्क और तकनीकी निगरानी की अहमियत बताई है। पर्याप्त क्षमता वाली बिजली लाइनें और आधुनिक सबस्टेशन होने से बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
एमपी ट्रांसको करेगी नेटवर्क मजबूत
बिजली नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर जोरवर्तमान में एमपी ट्रांसको के 418 अति उच्च दाब सबस्टेशनों के माध्यम से प्रदेश में बिजली का पारेषण किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य बढ़ती बिजली जरूरतों के अनुरूप इस नेटवर्क को मजबूत करना है।
प्रस्तावित विस्तार से बिजली लाइनों पर दबाव कम करने और सौर ऊर्जा सहित अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली को ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी।
4387 करोड़ की परियोजनाओं के लिए मांगी मंजूरीपारेषण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एमपी ट्रांसको ने 4387 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं का प्रस्ताव मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सामने रखा है। इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद काम आगे बढ़ सकेगा।
कंपनी वित्तीय संस्थानों से ऋण लेकर भी संसाधन जुटा रही है। परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए जमीन, बिजली लाइनों के मार्ग और अन्य जरूरी स्वीकृतियों से जुड़ी बाधाएं दूर करना महत्वपूर्ण होगा।
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बैटरी स्टोरेज से भी मिलेगी मददसौर ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव के दौरान बिजली आपूर्ति संतुलित रखने के लिए बैटरी स्टोरेज उपयोगी हो सकता है। इसमें अतिरिक्त बिजली जमा करके जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है।
आधुनिक निगरानी व्यवस्था और वैकल्पिक पारेषण मार्ग भी तकनीकी खराबी के दौरान बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने में मदद कर सकते हैं। एमपी ट्रांसको ने जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी, एशियन डेवलपमेंट बैंक और ग्रीन एनर्जी कारिडोर कार्यक्रम की सहायता से भी परियोजनाएं पूरी की हैं।
प्रदेश में सौर ऊर्जा की बढ़ती क्षमता के अनुरूप निर्बाध पारेषण और ग्रिड में उसके प्रभावी एकीकरण के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार बिजली लाइनों और पारेषण नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, ताकि उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहे। सुनील तिवारी, प्रबंध संचालक, एमपी ट्रांसको
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