
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश भर में स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। प्रदेश भर में 32 हजार शिक्षकों के प्रमोशन होना है। लेकिन पदोन्नति की प्रक्रिया वरिष्ठता के हिसाब से होगी।
ऐसे में जिले की वरिष्ठता सूची में शुरुआत से 1050 शिक्षकों के प्रमोशन होना है। लेकिन इस प्रक्रिया में पात्रता परीक्षा उन शिक्षकों के लिए रोड़ा बन गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक पात्रता परीक्षा की कैटेगरी में आ रहे हैं। हालांकि शिक्षकों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से हर्ष था, लेकिन जो शिक्षक पात्रता परीक्षा में आ रहे हैं, वे मायूस हैं, क्योंकि बिना पात्रता परीक्षा पास किए उन्हें पदोन्नति के लाभ नहीं मिल पाएगा।
इस प्रक्रिया से न केवल शिक्षकों के सेवाकाल को उचित पहचान मिलेगी, बल्कि लंबे समय से एक ही पद पर कार्य कर रहे शिक्षकों को करियर में आगे बढ़ने का बेहतरीन अवसर भी प्राप्त होगा। अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए जिला स्तर पर वरिष्ठता सूची तैयार करने और उसका मिलान करने का कार्य तेजी से चल रहा है।
जिले के करीब 3500 शिक्षक 1998 से 2008 के बीच में नियुक्त किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार 2010 तक नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। वरिष्ठता सूची में इन शिक्षकों की संख्या अधिक है। स्कूल शिक्षा विभाग ने भी साफ किया है कि शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ पात्रता परीक्षा पास करने के बाद ही मिलेगा। चूंकि ये शिक्षक पात्रता परीक्षा का पहले से ही विरोध कर रहे हैं, ऐसे में इन शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
भले ही पात्रता परीक्षा को लेकर शिक्षकों में असंतोष व्याप्त हो, लेकिन शिक्षा विभाग अपने तय शेड्यूल के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटा है। जिले के लगभग 1050 शिक्षकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि शासन स्तर पर इस अड़चन को लेकर कोई राहत दी जाती है या फिर परीक्षा पास करने की शर्त को ही अंतिम माना जाता है।
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शासन के निर्देशानुसार प्रक्रिया चल रही है। नियमानुसार वरिष्ठता के हिसाब से जो पात्र होगा, उसे ही पदोन्नति का लाभ मिलेगा। स्वीटी मंगल, जिला शिक्षा अधिकारी ग्वालियर
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