
नईदुनिया प्रतिनिधि, नर्मदापुरम: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रदेश में नदी घाटों से रेत चोरी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। इस नेटवर्क में नर्मदापुरम में किराए के मकान में रहने वाले अजय अग्रवाल उर्फ बबलू का भी नाम आया है। यह आदमी एक रेत खनन कंपनी में 15,000 रुपये मासिक का कर्मचारी है। अब ईडी बता रही है कि इसने और अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट (ईटीपी) बेचकर 30 करोड़ रुपयों से अधिक की कमाई की है।
ईडी ने नौ जनवरी को अवैध रेत खनन और मनी लांड्रिंग के मामले में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 16 ठिकानों पर दबिश दी थी। मप्र में एजेंसी की टीम बैतूल जिले के डहरगांव स्थित जुबेर पटेल के फार्महाउस पर पहुंची थी। वहीं नर्मदापुरम की मंगलमय कॉलोनी में बबलू अग्रवाल के यहां दबिश हुई। बबलू यहां किराए के मकान में रहता है।
ईडी के अधिकारियों ने सुबह छह बजे से रात तक मकान की तलाशी ली और बबलू से पूछताछ की थी। बाद में उसे छोड़कर वे चले गए। अब ईडी ने कहा है कि अजय उर्फ बबलू अग्रवाल एक बड़े संगठित रेत माफिया गिरोह का सदस्य है। वह अपने साथी राहुल खन्ना के साथ मिलकर मध्यप्रदेश के वैध रेत घाटों के नाम पर फर्जीवाड़ा करता था।
नागपुर में रेत माफिया को 6 हजार से 10 हजार रुपये प्रति ईटीपी के हिसाब से बेचा जाता था। ईडी ने जीपीएस डेटा एनालिसिस में पाया गया कि जिन वाहनों का उल्लेख इन ईटीपी में किया गया था वे कभी मप्र नहीं गए। ईडी ने मामले में कार्रवाई जारी होने की बात भी कही है।
इस मामले में अजय उर्फ बबलू अग्रवाल ने बताया कि वह राहुल खन्ना को नहीं जानता। हालांकि उसने राहुल बड़िवा को परिचित बताया। अजय ने बताया कि ये दोनों राहुल आपस में परिचित हैं। मैं सीधे तौर पर राहुल खन्ना को नहीं जानता। उन्होंने बताया कि एक-दो बार राहुल खन्ना ने मेरे खाते में पैसे डाल दिए। जब मुझे इसकी जानकारी मिली तो मैने वह राशि राहुल बाडिवा के खाते में डाल दी। इससे ज्यादा मुझे मामले की कोई जानकारी नहीं हैं।
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अजय पहले नागपुर में रेत कंपनी में काम करता था। राहुल बाड़ीवा धनलक्ष्मी और अजय आरकेटीसी कंपनी में काम करते थे। वर्ष 2022 में उनकी दोस्ती हुई थी। राहुल बाडिवा नरसिंहपुर की रॉयल्टी काटता था। फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद अजय कानूनी सलाह लेने की बात कह रहा है। अजय ने बताया कि उसने नागपुर में ईडी के अधिकारियों से भी संपर्क किया है।