
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को स्वीकारने में शासन अब भी टालमटोल कर रहा है। दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच जनहित याचिकाओं में गुरुवार को एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर मुख्य सचिव अनुराग जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। उन्होंने यह तो स्वीकारा कि दूषित पानी से मौतें हुई हैं, लेकिन कितनी, इस सवाल पर वे उलझ गए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि आप कितनी मौतें मान रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 23 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन शासन-प्रशासन यह बात स्वीकार नहीं कर रहा है। इस पर सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि गुरुवार सुबह रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें 21 मौतों की बात स्वीकारी गई है। 15 व्यक्तियों की मौत दूषित पानी से हुई है। शेष छह की मौत अन्य बीमारियों से हुई है। गुरुवार को हाई कोर्ट में करीब आधा घंटा सुनवाई चली।
वीसी के जरिये उपस्थित मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर और छह जनवरी को दिए गए आदेशों का पालन हो रहा है। भागीरथपुरा के नागरिकों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में दूषित पानी के स्रोतों को तलाश कर बंद किया जा रहा है। पानी की लाइनें बदलने के लिए हाल ही में एक ठेका दिया गया है। दो ठेके पूर्व में दिए जा चुके हैं। पीड़ितों को निश्शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 51 बोरिंग मिले हैं जिनका पानी दूषित पाया गया है। इन्हें बंद करा दिया गया है।
मुख्य सचिव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब तक 1.62 लाख लोगों का सर्वे कर चुकी हैं। अब तक 440 मरीज मिले, जिन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 411 ठीक हो चुके हैं। 29 का उपचार चल रहा है। घटना के बाद अपर आयुक्त को निलंबित कर दिया गया है। निगमायुक्त का भी ट्रांसफर कर दिया गया है।
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