
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से 20 मौत के बाद अब इंदौर शहर के पेयजल की सुरक्षा के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत शहर में बनी 105 पानी की टंकियों पर क्लोरीन एनालाइजर लगाए जाएंगे। शहर में नर्मदा व बोरिंग के पानी की जांच के लिए नया सिस्टम तैयार किया जाएगा। शहर की पेयजल व ड्रेनज लाइनों की जांच की जाएगी।
शहर के पेयजल एक्शन प्लान पर शुक्रवार को संभागायुक्त कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और जिले के प्रभारी एवं अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने यह जानकारी दी। बैठक में तय किया गया कि भागीरथपुरा में नर्मदा पाइप लाइन से जुड़े सभी बोरिंग सील होंगे और बोरिंग की अलग लाइन बिछाई जाएगी।
भागीरथपुरा पानी की टंकी का पानी पूर्ण रूप से सुरक्षित पाया गया है, ऐसे में 12 जुलाई से भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा पेयजल लाइन से जल वितरण किया जाएगा। वहां के लोगों को एहतियात के तौर पर पानी उबालकर पीने की सलाह भी दी जाएगी।
संभागायुक्त कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे इंदौर की जल आपूर्ति और भूजल गुणवत्ता की जांच की जाएगी। नर्मदा की मेन पाइपलाइन के साथ ही सीवेज लाइन की जांच के साथ ही चैंबरों की लीकेज को रोका जाएगा। टूटे फूटे और कच्चे चेंबरों प्लास्टरिंग एवं सीलिंग के कार्य को प्राथमिकता के साथ किया जाएगा। बैठक में संभागायुक्त डा. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल आदि मौजूद रहे।
अपर मुख्य सचिव राजन ने बताया कि भागीरथपुरा से लिए पानी के सैंपल की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जिससे यह मामला जल प्रदूषण से जुड़ा माना जा रहा है। हालांकि लीकेज का एक सटीक स्रोत अब तक चिन्हित नहीं हुआ है। यह संभावना एक से अधिक स्थानों से पेयजल दूषित हुआ है। ऐसे में नर्मदा पेयजल की मुख्य लाइन के साथ सभी संभावित लीकेज, चैंबर्स और जर्जर पाइपलाइनों को दुरुस्त करने का निर्णय लिया गया है।
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भागीरथपुरा की घटना से सबक लेते हुए शहर की जल आपूर्ति और भूजल गुणावत्ता की निगरानी का फैसला लिया गया है। निगम द्वारा शहर की 105 पानी की टंकियों पर क्लोरीन एनालाइजर लगाए जाएंगे।इससे रियल टाइम पर पानी में घुले क्लोरीन का डेटा मूसाखेड़ी स्थित निगम के नर्मदा प्रोजेक्ट कार्यालय में पहुंचेगा। यदि पानी की टंकी में क्लोरीन मात्रा कम मिली तो चलित मोबाइल लैब के माध्यम से टंकी के पानी में क्लाेरीन मिलाया जाएगा।
स्व सहायता समूह घर-घर जाकर पानी रैंडम क्लोरीन की जांच करेगी। नगर निगम थर्ड पार्टी एजेंसी तय करेगा जो शहर की अलग-अलग हिस्सों पानी की गुणवत्ता की जांच करेगी व रिपोर्ट निगमायुक्त को देगी। थर्ड पार्टी एजेंसी व चलित मोबाइल लैब शहर के अलग-अलग कालोनियों में जाकर नर्मदा व बोरिंग के पानी की जांच करेगी।
इंदौर वाटर वर्क एसोसिएशन के माध्यम से नगर निगम के कर्मचारियों को पानी की गुणवत्ता जांचने व सैम्पल लेने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक पानी की टंकी पर एक कर्मचारी पानी की सप्लाई के दौरान मौजूद रहेगा।
भागीरथपुरा में रहने वाले 6 हजार परिवारों को 21-22 जोन में बांटा जाएगा। प्रत्येक जोन में नगर निगम का एक प्रभारी अधिकारी रहेगा, जो 50 से 100 घरों के संपर्क में रहकर डिस्चार्ज हुए मरीजों की फालो-अप निगरानी करेगा, ताकि बीमारी के दोबारा फैलने की आशंका न रहे। स्थानीय कम्युनिटी की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।वहीं गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों का विशेष सर्वे करने का भी निर्णय लिया है।
भागीरथपुरा की घटना को देखते हुए प्रदेश स्तर पर पानी की शुद्धता का अभियान शनिवार से शुरु होगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव प्रदेशभर में शुद्ध पेयजल अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सभी जल स्रोतों की जांच, सुधारात्मक कार्रवाई और जनजागरूकता पर विशेष जोर दिया जाएगा।
भागीरथपुरा वार्ड के रहवासियों की जांच के लिए विशेष मेगा हेल्थ कैंप लगाया जाएगा। अभी तक यहां के रहवासियों की उल्टी, दस्त व डायरिया संबंधित जांच हुई है। अब यहां के लोगों असंक्रमित बीमारी जैसे डायबिटिज, एनिमिया, कुपोषण संबंधित अन्य जांचे भी की जाएगी।
- शिवम वर्मा, कलेक्टर